फैटी लिवर और हेपेटाइटिस से बढ़ रहा कैंसर का खतरा, समय पर जांच से बच सकती है जान

फैटी लिवर और हेपेटाइटिस से बढ़ रहा कैंसर का खतरा, समय पर जांच से बच सकती है जान

September 23, 2026 0 By Central News Service

लिवर की बीमारियों के प्रति सतर्कता जरूरी

रायपुर। लिवर कैंसर दुनिया भर में सबसे तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में से एक बनकर उभरा है। यह बात यशोदा हॉस्पिटल्स, हाइटेक सिटी, हैदराबाद के क्लिनिकल डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. नवीन पोलावरपु ने कही।

आज रायपुर में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. नवीन ने लिवर रोगों के बढ़ते बोझ और समय पर पहचान के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि फैटी लिवर, हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण तथा अत्यधिक शराब का सेवन लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। लिवर की बीमारी को “साइलेंट किलर” बताते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर लोगों को तब तक अपनी बीमारी का पता ही नहीं चलता जब तक पैरों में सूजन, पेट में पानी भरना या लिवर कैंसर जैसे गंभीर लक्षण सामने न आ जाएं। तब तक बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है।

समय पर जांच और टीकाकरण जरूरी

डॉ. नवीन ने लिवर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस बी और सी वायरस सालों तक बिना लक्षण के शरीर में रह सकते हैं और धीरे-धीरे लिवर को खराब करते रहते हैं। समय पर स्क्रीनिंग, हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण और सही उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

फैटी लिवर और पाचन रोगों पर चेतावनी

फैटी लिवर से बचाव के लिए उन्होंने कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और थायराइड को नियंत्रित रखने पर जोर दिया। साथ ही चेतावनी दी कि अत्यधिक शराब का सेवन पैंक्रियाटाइटिस (अग्न्याशय में सूजन) का कारण बन सकता है, जो जानलेवा भी हो सकता है। शराब से दूरी बनाकर लिवर और पैंक्रियाज दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अस्वास्थ्यकर खान-पान के कारण गैस्ट्रिक और पाचन संबंधी विकार तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि मल त्याग की आदतों में बदलाव, मल में खून, पेट फूलना जैसे लक्षण दो सप्ताह से अधिक बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

उन्होंने बताया कि कोलोनोस्कोपी के जरिए आंत के पॉलीप्स को शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर हटाया जा सकता है, जिससे कई मामलों में कोलोरेक्टल कैंसर को रोका जा सकता है। पश्चिमी देशों में कोलोनोस्कोपी के प्रति जागरूकता से कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।

यशोदा हॉस्पिटल्स, हाइटेक सिटी, हैदराबाद 2000 बेड की क्षमता के साथ अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों और किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।