सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि व उज्जवला सब्सिडी घटाकर मोदी सरकार ने गरीबों की रसोई पर किया हमला – विनोद चंद्राकर

सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि व उज्जवला सब्सिडी घटाकर मोदी सरकार ने गरीबों की रसोई पर किया हमला – विनोद चंद्राकर

June 9, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद 08 जून 2026// केंद्र की मोदी सरकार द्वारा रसोई गैस के दाम में 29 रु. की वृद्धि व उज्जवला योजना के हितग्राहियों को साल भर में मिलने वाली सिलेंडरों की संख्या घटकार 4 किये जाने के निर्णय को पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने जनविरोधी सरकार का तानाशाही फरमान कहा है।

चंद्राकर ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के तीसरे कार्यकाल के आज 2 साल तथा प्रदेश में इनकी सरकार बने ढ़ाई साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन महंगाई कम होने के बजाए दिन-प्रतिदन बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के लिए तो इन्होंने 500 रु. में रसोई उपलब्ध कराने के जुमले फेंके थे। गरीब उज्जवला हितग्राहियों सहित समस्त माताओं – बहनों से 500 रु. में साल भर 12 सिलेंडर उपलब्ध कराने के वादे किए थे। आज इस वादे को भाजपा भूल चुकी है।

चंद्राकर ने कहा कि एक तरफ मोदी सरकार अपने 12 साल के कार्यकाल पूरे होने पर उत्साह मना रही है। वहीं, दूसरी ओर आम जनों पर महंगाई का बोझ डालकर उनकी जीवन कठिनाइयों से भर रहा है। मोदी सरकार ने एक बार फिर गरीब और मध्यम वर्ग की रसोई पर हमला किया है। घरेलू व कमर्शियल गैस के दाम में लगातार वृद्धि की जा रही है। इससे आम आदमी का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। इसी के साथ उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों को सबसे बड़ा झटका दिया गया है।

पूर्व संसदीय सचिव चंद्राकर ने कहा कि पहले साल में 12 सिलेंडर पर सब्सिडी मिलती थी, फिर इसे 9 किया गया और अब घटाकर सिर्फ 4 कर दिया गया है। 5वां सिलेंडर लेने पर 1023 रुपये चुकाने होंगे। यह फैसला उन 11 करोड़ परिवारों के साथ धोखा है जिन्हें प्रधानमंत्री ने मुफ्त कनेक्शन देकर धुएं से मुक्ति का वादा किया था। सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों और तेल कंपनियों के घाटे का हवाला दे रही है। लेकिन सवाल यह है कि जब कच्चा तेल सस्ता था तब दाम क्यों नहीं घटाए गए। 60 हजार करोड़ के घाटे की भरपाई गरीब की थाली से क्यों की जा रही है।

मोदी सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपये तेल कंपनियों को मुआवजा दिया, पर जनता को राहत देने के लिए उसके पास पैसा नहीं है। उज्ज्वला योजना की औसत खपत 4 सिलेंडर बताकर सरकार अपनी नाकामी छुपा रही है। सच्चाई यह है कि महंगाई के कारण गरीब परिवार सिलेंडर रिफिल ही नहीं करा पा रहे हैं। सरकार पहले लोगों को मजबूर करती है कि वे कम सिलेंडर लें, फिर उसी को आधार बनाकर सब्सिडी घटा देती है। उन्होंने मांग की है कि गैस सिलेंडर के दाम तत्काल 100 रुपये कम किए जाएं, उज्ज्वला योजना में साल में 12 सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी बहाल की जाए। बढ़ी हुई एक्साइज ड्यूटी वापस ली जाए।