FSSAI नियमों में सुधार और लाइसेंस को आजीवन वैध बनाने की मांग, CAIT ने केंद्रीय मंत्री पासवान को भेजे सुझाव
June 6, 2026रायपुर, 6 जून 2026। देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों में बड़े सुधार की मांग की है। CAIT ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री चिराग पासवान को विस्तृत सुझाव पत्र भेजकर FSSAI लाइसेंस को आजीवन वैध बनाने और FoSTaC प्रशिक्षण नियमों को व्यावहारिक बनाने की अपील की है।
CAIT के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन अमर पारवानी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के मानकों को बनाए रखना जरूरी है, लेकिन मौजूदा प्रक्रियाओं से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम व्यापारियों को अनावश्यक प्रशासनिक, वित्तीय और समयगत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नियमों को व्यापार-अनुकूल बनाने से ‘Ease of Doing Business’ को बढ़ावा मिलेगा।
CAIT देशभर के लगभग 9 करोड़ और छत्तीसगढ़ के लगभग 12 लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है। व्यापारियों के अनुभव के आधार पर संगठन ने FSSAI के प्रावधानों में संशोधन की जरूरत बताई है।
मुख्य मांगें:
1. लाइसेंस एवं पंजीकरण आजीवन वैध हों: CAIT ने मांग की है कि FSSAI पंजीकरण और लाइसेंस के बार-बार नवीनीकरण की अनिवार्यता खत्म की जाए। जब तक व्यवसाय के स्वामित्व, पते, साझेदारी संरचना या प्रकृति में कोई बड़ा बदलाव न हो, तब तक नवीनीकरण जरूरी न हो। इससे विभागीय काम कम होगा और छोटे व्यापारियों को खर्च व जटिलताओं से राहत मिलेगी।
2. FoSTaC प्रशिक्षण में व्यावहारिक बदलाव: संगठन ने कहा कि FoSTaC प्रशिक्षण की अनिवार्यता को व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार तय किया जाए। देश में बड़ी संख्या में व्यापारी केवल सीलबंद, पैकेटबंद, ब्रांडेड खाद्य उत्पाद, अनाज व दालें बेचते हैं। वे खाद्य निर्माण या प्रसंस्करण नहीं करते। ऐसे व्यापारियों को FoSTaC प्रशिक्षण से छूट दी जाए या उनके लिए अलग सरल व्यवस्था बनाई जाए।
श्री पारवानी ने कहा कि CAIT खाद्य सुरक्षा के उच्च मानकों का पूरा समर्थन करता है, लेकिन नियमों का मकसद व्यापारियों पर बोझ बढ़ाना नहीं होना चाहिए। इन सुझावों पर अमल से करोड़ों छोटे-मध्यम व्यापारियों को राहत मिलेगी और वे रोजगार व आर्थिक विकास में ज्यादा योगदान दे पाएंगे।
उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान व्यापार जगत की इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखते हुए व्यापार-अनुकूल सुधार करेंगे।
“व्यापारी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। नियम ऐसे हों जो सुरक्षा भी सुनिश्चित करें और व्यापार को भी प्रोत्साहित करें,” अमर पारवानी ने कहा।
इस संयुक्त बयान में छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेन्द्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, अध्यक्ष परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन सुरिन्दर सिंह, जीवत बजाज, महामंत्री अवनीत सिंह, कोषाध्यक्ष विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र जग्गी, वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी एवं शंकर बजाज भी शामिल रहे।


