खाद संकट, महंगाई और अव्यवस्था से किसान परेशान : विनोद चंद्राकर

खाद संकट, महंगाई और अव्यवस्था से किसान परेशान : विनोद चंद्राकर

May 28, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद 28 मई 2026/ पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में यूरिया, डीएपी जैसे खाद की कृत्रिम संकट उत्पन्न किया जा रहा है। जिससे किसानों में सरकार के विरूद्ध भारी आक्रोश पनप रहा है। खाद की कमी प्राकृतिक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से पैदा किया गया संकट है। बड़े व्यापारी, बिचौलिए और सप्लाई सिस्टम से जुड़े लोग किसानों का हक मारकर अवैध मुनाफाखोरी कर रहे हैं। यदि खाद संकट होता तो सोसायटियों के साथ-साथ बाजारों में भी इसका असर दिखता। लेकिन, अिधक दर पर कोचियों द्वारा खाद बेचा जा रहा है। 266 का यूरिया 12 साै  रुपए तथा 1350 की डीएपी 1800 से 2000 रुपए में बेची जा रही है।

चंद्राकर ने कहा कि प्रदेशभर में किसान यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खाद के लिए भटक रहे हैं। प्रदेश के किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं, उत्पादन लागत में वृद्धि, डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों, मजदूरी संकट और बिजली कटाैती की मार झेल रहे हैं। ऐसे में समय पर खाद नहीं मिलने से खरीफ की तैयारी कर रहे किसान चिंतित हैं। सरकार द्वारा किसानों को रकबे के आधार पर किस्तों में खाद उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। जो किसान विरोधी निर्णय है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में किसानों को खाद के लिए इतना परेशान नहीं होना पड़ा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों को समय पर राहत प्रदान करने खाद का भंडारण सोसायटियों में कर लिया जाता था। 1 अप्रैल से खाद का वितरण शुरू हो जाता था। लेकिन, इस बार भाजपा सरकार ने कृषि ऋण वितरण नीति में भी बदलाव कर दिया। किसानों को कम खाद देने का नियम बनाया गया है। प्रदेश में खाद की उपलब्धता को लेकर भी लगातार अव्यवस्था बनी हुई है। कई सहकारी समितियों और कृषि केंद्रों में समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही, जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की लापरवाही के कारण किसान सीजन के दौरान खाद के लिए भटकने को मजबूर हैं।

चंद्राकर ने कहा कि वर्तमान भाजपा की सरकार हर क्षेत्र में विफल साबित हुई है। सरकार अपनी आर्थिक बदहाली का बोझ किसानों पर डाल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और गलत प्राथमिकताओं के कारण प्रदेश आज कर्ज में डूब चुका है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने से पहले बड़ी-बड़ी गारंटियां दी थीं, लेकिन आज स्थिति यह है कि न युवाओं को रोजगार मिला, न महिलाओं से किए वादे पूरे हुए और न ही किसानों को राहत। उल्टा हर वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है।