पिथौरा में स्टाम्प माफिया का खुला खेल! तय दर से ज्यादा वसूली, सवाल उठाने पर धमकी – महिला पत्रकार से अभद्रता, मानहानि कि दी धमकी, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में…

पिथौरा में स्टाम्प माफिया का खुला खेल! तय दर से ज्यादा वसूली, सवाल उठाने पर धमकी – महिला पत्रकार से अभद्रता, मानहानि कि दी धमकी, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में…

April 10, 2026 0 By Central News Service

पिथौरा 10 अप्रैल 2026/ नगर में इन दिनों स्टाम्प वेंडरों की मनमानी चरम पर है। यहां स्टाम्प पेपर की बिक्री शासन द्वारा निर्धारित दरों को दरकिनार कर प्रशासन के नाक के नीचे खुलेआम मनमाने दामों पर की जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ग्रामीण अतिरिक्त राशि देने को मजबूर हैं, वहीं विरोध करने पर उन्हें धमकियों और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि 10 रुपये मूल्य के स्टाम्प को 15 रुपये, 20 रुपये के स्टाम्प को 30 रुपये, 50 रुपये के स्टाम्प को 60 रुपये तथा 100 रुपये के स्टाम्प को 120 रुपये में बेचा जा रहा है। यानी हर स्टाम्प पर खुलेआम अतिरिक्त वसूली की जा रही है, जो सीधे-सीधे शासन के नियमों का उल्लंघन है। कुछ प्रकरण में पांच हजार छह हजार तक भी बोला गया है

ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय कार्यों, हलफनामा और अन्य जरूरी कार्यो के लिए स्टाम्प लेना अनिवार्य होता है, जिसका फायदा उठाकर वेंडर मनमानी वसूली कर रहे हैं। कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि कोई तय दर की बात करता है तो उसे डांट-फटकार कर भगा दिया जाता है।

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नगर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित महिला पत्रकार शिखा दास ने मामले की सच्चाई जानने के लिए मौके पर पहुंचकर स्टिंग जैसी पड़ताल की। उन्होंने सूचना का अधिकार आवेदन के लिए 10 रुपये का स्टाम्प खरीदना चाहा, लेकिन स्टाम्प वेंडर दुष्यंत डड़सेना ने 15 रुपये की मांग की।

जब पत्रकार ने अतिरिक्त राशि का कारण पूछा, तो आरोप है कि वेंडर ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, पत्रकारों पर ही झूठी खबरें प्रकाशित करने का आरोप लगाते हुए अपमानजनक टिप्पणी की गई। मामले को और गंभीर बनाते हुए वेंडर द्वारा कथित रूप से यह भी कहा गया कि अतिरिक्त वसूली की राशि “ऊपर तक” पहुंचाई जाती है। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह केवल एक वेंडर की मनमानी नहीं, बल्कि एक संगठित भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित वेंडर दुष्यंत डड़सेना, नोटरी तुलसीराम डड़सेना का पुत्र है और नोटरी कक्ष में बैठकर ही स्टाम्प की बिक्री करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस पूरे मामले में और लोग भी शामिल हैं? जो कि जाँच का विषय है।


उन्होंने न केवल संबंधित वेंडर का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है, बल्कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की भी मांग की है।

नगर में खुलेआम हो रही इस अवैध वसूली ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर लंबे समय से चल रही इस मनमानी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही थी?

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कलेक्टर ,उप पंजीयक ,जिला पंजीयक, अधिवक्ता संघ सभी पत्रकार ब्यूरो चीफ सम्पादक पत्रकारों तक जानकारी दी जा रही ।