मार्च में राशन से वंचित उपभोक्ताओं को 4 माह का राशन प्रदान करें सरकार – विनोद चंद्राकर….3 नहीं 4 माह का चावल प्रदान कर मनाए चावल उत्सव

मार्च में राशन से वंचित उपभोक्ताओं को 4 माह का राशन प्रदान करें सरकार – विनोद चंद्राकर….3 नहीं 4 माह का चावल प्रदान कर मनाए चावल उत्सव

April 10, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद 10 अप्रैल 2026/ पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा सरकार द्वारा मनाए जा रहे चावल उत्सव को सस्ता प्रचार का माध्यम बताते हुए कहा कि अप्रैल माह में एकमुश्त तीन माह का चावल प्रदान करने की बात सरकार कर रही है। जबकि, महासमुंद शहर के सैकड़ों हितग्राहियों को मार्च महीने का चावल नहीं मिल पाया है। मार्च महीने में साफ्टवेयर अपडेट तथा केवायसी अपडेट के बहाने चावल वितरण प्रभावित हुआ था। ऐसे अनेक गरीब बीपीएल हितग्राही परिवार हैं, जिनके परिवार के एक या दो सदस्य के केवायसी अपडेट नहीं होने पर उनका चावल रोक दिया गया था। उसके बाद साफ्टवेयर अपडेट के नाम पर लगभग सप्ताह भर चावल वितरण बाधित कर दिया गया। जिससे महासमुंद शहर के लगभग 460 सहित महासमुंद विधानसभा के सैकड़ों गांवों के हजारों बीपीएल हितग्राहियों को मार्च का राशन नहीं मिल पाया है। चंद्राकर ने कहा कि यह हाल शहर सहित पूरे जिले व प्रदेश का है। प्रदेश भर में लाखों हितग्राहियों का राशन रोका गया है।

चंद्राकर ने कहा कि चूंकि, अब सरकार चावल उत्सव के नाम पर अपना प्रचार-प्रसार कर रहा है। ऐसे में अप्रैल, मई व जून कुल तीन माह का चावल देने की बात कही जा रही है। लेकिन, मार्च का राशन जिन्हें नहीं मिला उन्हें मार्च, अप्रैल, मई, जून कुल चार माह का चावल प्रदान किया जाना चाहिए। सैकड़ों गरीब परिवार हैं, जो प्रशासनिक निरंकुशता के चलते राशन से वंचित हो गए हैं।

पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि गरीब हितग्राहियों के हक के चीजों को भी भाजपा की साय सरकार प्रचार-प्रसार का माध्यम बना रहा है। तीन माह का चावल कोई खैरात नहीं गरीबों का अधिकार है। सरकार सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश चावल उत्सव के नाम पर कर रही है। उन्होंने कहा कि गरीबों के हित के लिए सरकार यदि संवेदनशील हैं तो मार्च महीने में राशन से वंचित गरीब हितग्राहियों को चार माह का चावल एक साथ प्रदान करें। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन माह का चावल देने की तैयारी करने वालों की सरकार को यह भी पता नहीं है कि अनेक राशन दुकानों में तीन माह का स्टाक नहीं हो पाया है।

पहले सरकार ने केवाईसी के नाम पर राशन वितरण में बाधा डाला। हजारों उपभोक्ताओं का राशन कार्ड केवाईसी के बहाने निरस्त कर दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले ही राशन कार्ड बनाते समय आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लिए गए थे, तो अचानक बड़ी संख्या में कार्ड निरस्त करने की क्या आवश्यकता थी। भाजपा की साय सरकार नहीं चाहती कि सभी पात्र लोगों को राशन उपलब्ध कराया जाए। इसलिए केवाईसी अपडेट को बहाना बनाकर लाखों परिवारों को व्यवस्था से बाहर किया जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में लोग राशन के लिए भटकने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में पीडीएस व्यवस्था पारदर्शी और विश्वसनीय मानी जाती थी। गरीबों को व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत राशन कार्ड जारी किए गए थे, जिसमें स्थानीय निकायों की भागीदारी और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शामिल थी। 2023 में सरकार बदलने के बाद पुनः राशन कार्डों को निरस्त कर लोगों को नए कार्ड बनवाने के लिए मजबूर किया गया। वर्तमान में भी प्रदेश के लाखों परिवार केवाईसी के अभाव में राशन से वंचित हैं।