रायपुर में रक्तदान के प्रहरी: नरेश साहू को राजभवन में राज्यपाल द्वारा सम्मान
June 14, 2026रायपुर, छत्तीसगढ़। रक्तदान को जन-आंदोलन बनाने वाले समाजसेवी नरेश साहू को आज राजभवन में महामहिम राज्यपाल के कर-कमलों से विशेष सम्मान प्रदान किया गया। पिछले एक दशक से रक्तदान के क्षेत्र में समर्पित भाव से काम कर रहे नरेश साहू ने न सिर्फ स्वयं 21 बार रक्तदान किया है, बल्कि सैकड़ों युवाओं को भी इस जीवनदायी कार्य से जोड़ा है।
10 साल,एक संकल्प: रक्तदान से जीवनदान
नरेश साहू ने 2016 में रक्तदान की शुरुआत की थी। तब से लेकर आज तक उन्होंने इसे मिशन बना लिया। वे बताते हैं, “अस्पताल में किसी को खून न मिलने से हुई परेशानी देखी, उसी दिन ठान लिया कि लोगों को जागरूक करना है। रक्तदान महादान है और यह मानवता की सच्ची सेवा है।”
पिछले 10 वर्षों में नरेश ने रायपुर समेत आसपास के जिलों में 30 से अधिक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित करवाए। इन शिविरों के माध्यम से 1500 से ज्यादा यूनिट रक्त संग्रहित कर जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया गया। वे स्कूल, कॉलेज, गांव-गांव जाकर युवाओं को जोड़ते हैं और समझाते हैं कि “रक्त नालियों में नहीं, नाड़ियों में बहना चाहिए”।
युवाओं को किया प्रेरित, बनाया रक्तवीर
नरेश साहू की सबसे बड़ी उपलब्धि है युवाओं की टोली तैयार करना। उन्होंने ‘रक्तवीर समूह’ बनाया है जिसमें 200 से अधिक सक्रिय सदस्य हैं। थैलेसीमिया, प्रसव, दुर्घटना और गंभीर बीमारियों के मरीजों को जब भी खून की जरूरत पड़ती है, यह समूह 24 घंटे तैयार रहता है।
समाजसेवी नरेश भी मानते हैं कि रक्तदान को हर गांव तक ले जाना जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्राम स्तर पर जागरूकता रैलियां, नुक्कड़ नाटक और स्वास्थ्य जांच शिविर भी करवाए।
राजभवन में हुआ सम्मान
आज राजभवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राज्यपाल महोदय ने नरेश साहू को प्रशस्ति पत्र, शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा, “नरेश जी जैसे स्वयंसेवक समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। आज के स्वार्थी दौर में निःस्वार्थ सेवा एक बड़ी मिसाल है”। उन्होंने युवाओं से वर्ष में कम से कम एक बार रक्तदान करने की अपील भी की।
नरेश साहू का संदेश
सम्मान पाने के बाद नरेश साहू ने कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं, उन सभी रक्तवीरों का है जो चुपचाप दूसरों की जिंदगी बचाते हैं। मेरा सपना है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी व्यक्ति खून की कमी से जान न गंवाए।
रक्तदान करने वाले सभी स्वयंसेवकों को प्रमाणपत्र भी दिए गया हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर वे या उनके परिजन निःशुल्क रक्त प्राप्त कर सकें।
छत्तीसगढ़ में रक्तदान के क्षेत्र में नरेश साहू का नाम अब मिसाल बन चुका है। राजभवन से मिला यह सम्मान हजारों युवाओं को इस नेक काम से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा।

