व्यक्ति के चरित्र का निर्माण कर राष्ट्र को सुदृढ़ बनाना ही संघ का कार्य – उमेश…​राष्ट्र निर्माण के ‘पंच परिवर्तन’ संकल्प के साथ आचार्य चाणक्य शाखा ने मनाया वर्ष प्रतिपदा उत्सव

व्यक्ति के चरित्र का निर्माण कर राष्ट्र को सुदृढ़ बनाना ही संघ का कार्य – उमेश…​राष्ट्र निर्माण के ‘पंच परिवर्तन’ संकल्प के साथ आचार्य चाणक्य शाखा ने मनाया वर्ष प्रतिपदा उत्सव

March 19, 2026 0 By Central News Service


महासमुंद 19 मार्च 2026/ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महासमुन्द के आचार्य चाणक्य युवा व्यवसायी प्रभात शाखा द्वारा हिन्दू नववर्ष के पावन अवसर पर भव्य ‘नववर्ष उत्सव एवं आद्य सरसंघचालक प्रणाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के इस मांगलिक अवसर पर युवा व्यवसायियों और स्वयंसेवकों ने राष्ट्र सेवा और सामाजिक समरसता का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता खंड बौद्धिक शिक्षण प्रमुख उमेश भारती गोस्वामी ने बताया कि “आज का दिन न केवल सृष्टि के आरंभ और नव संवत्सर का प्रतीक है, बल्कि यह संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार का अवतरण दिवस है।”

उन्होंने बताया कि “ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आज ही के दिन की थी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी का राज्याभिषेक, युधिष्ठिर संवत् का प्रारंभ आज ही के दिन हुआ। आज ही के दिन सम्राट विक्रमादित्य द्वारा विदेशी आक्रमणकारी शकों को पराजित कर भारत को मुक्त कराया था और विक्रम संवत का प्रारंभ हुआ था। शक्ति की भक्ति नवरात्र पर्व का प्रारंभ आज से ही प्रारंभ होता है। सिंधी समाज के इष्टदेव वरुण देव के अवतार संत झूलेलाल जी और सिखों के दूसरे गुरु अंगद देव का जन्म तथा स्वामी दयानंद द्वारा आर्य समाज की स्थापना आज ही के दिन किया गया था। शालिवाहन द्वारा विदेशी आक्रांताओं हूणों व शकों को परास्त कर बिखरते भारत को एकता के सूत्र में पिरोकर श्रेष्ठ भारत के निर्माण की नींव आज ही दिन रखी गई थी और इसी दिन से शक संवत का प्रारंभ हुआ जो आज राष्ट्रीय कैलेंडर है।”

मुख्य वक्ता श्री गोस्वामी ने आद्य सरसंचालक प्रणाम के विषय में बताया कि “यह स्वयंसेवक के भीतर राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, त्याग और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना को जीवित रखने का एक पवित्र संस्कार है, यह शक्ति व भक्ति का मिलन बिन्दु है जहां व्यक्ति स्वयं को राष्ट्र के महान कार्यों में विलीन कर देता है।” संघ शताब्दी वर्ष पर मुख्य वक्ता ने कहा कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना आज से 100 साल पहले 1925 में की गई थी। संघ स्थापना का प्रमुख उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित और अनुशासित करने के साथ-साथ व्यक्ति के चरित्र का निर्माण कर राष्ट्र को सुदृढ़ बनाना है और डॉ हेडगेवार ने इसके लिए एक अभिनव पद्धति शाखा का आविष्कार किया। संघ के शताब्दी वर्ष में समाज के साथ मिलकर विजयादशमी उत्सव, गृह संपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन, सामाजिक सद्भाव बैठक, प्रमुख जन गोष्ठी सहित युवाओं और शालेय विद्यार्थियों के कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। पंच परिवर्तन के विषय में उन्होंने कहा कि “भारत हमारी माता है और हम उनकी संतान हैं। भारत को परम वैभव के शिखर पर पहुंचाने के लिए अपने आचरण में पांच परिवर्तन करने होंगे। देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दृष्टि से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के साथ-साथ स्वदेशी आचार-व्यवहार का पालन करना होगा। जाति-पांति के भेदभाव से ऊपर उठकर संपूर्ण हिन्दू समाज को एक सूत्र में पिरोकर समाज में समरसता लाना होगा। परिवारों में भारतीय संस्कारों को जीवित रखने और संयुक्त परिवार की भावना को बढ़ाने हेतु कुटुंब प्रबोधन पर कार्य करना होग। पर्यावरण संरक्षण हेतु जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्ति और वृक्षारोपण को अपनी जीवनशैली में शामिल करना होगा। नागरिक कर्तव्यों का पालन करना हम सब का कर्तव्य है। एक समर्थ भारत के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में इन पांच आयामों को उतारना होगा।


सरस्वती शिशु मंदिर महासमुन्द में आयोजित कार्यक्रम का प्रारंभ आद्य सरसंघचालक प्रणाम व केशव अर्चना के साथ हुआ। सुभाषित, अमृत वचन व एकल गीत के पश्चात् मुख्य वक्ता का बौद्धिक प्राप्त हुआ। संघ प्रार्थना के पश्चात् सभी ने एक-दूसरे को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं और ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में खंड कार्यवाह राजेश डड़सेना, विभाग धर्म जागरण के विपिन शर्मा, जिला जनजातीय कार्य के चेतन ठाकुर, गौ सेवा आयोग के जिला अध्यक्ष नीलेश पटेल, जिला व्यवस्था प्रमुख संतोष ध्रुव, जिला सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख राधेश्याम सोनी, रामेश्वर साहू, कुणाल चन्द्राकर, जैनेन्द्र चन्द्राकर, मनीष श्रीवास्तव, संजय यादव, रमेश सहिस, पीयुष साहू, राधेश्याम साहू, विनय सिन्हा, आकाश पांडे, आकाश प्रजापति, त्रिवेदी महाराज, धीरेन्द्र सिन्हा, सुदेश कन्नौजे सहित आचार्य चाणक्य युवा व्यवसायी शाखा स्वयंसेवकों की सहभागिता बड़ी संख्या रही।