विद्या भारती छत्तीसगढ़ — राजिम विभाग…सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम संपन्न…
November 12, 2025
संपादक मनोज गोस्वामी
महासमुंद 12 नवंबर 2025/ सरस्वती शिशु मंदिर, महासमुंद में कल सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता श्रीमती सुनीता पांडे, अखिल भारतीय सह संयोजिका एवं क्षेत्रीय संयोजिका (बालिका शिक्षा, सप्तशक्ति संगम) रहीं। विशेष अतिथि के रूप में सुश्री शशि प्रभा थिटे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ज्योति चोपड़ा व श्रीमती संध्या शर्मा जी (जिला संयोजिका सप्तशक्ति संगम एवं आदर्श शिक्षा मंडल समिति के उपाध्यक्ष) उपस्थित थी।
मां भारती की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
स्वागत उपरांत श्रीमती मनोज साहू, प्रांतीय बालिका शिक्षा प्रमुख ने सप्तशक्ति संगम की प्रस्तावना एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि —
“सप्तशक्ति संगम का उद्देश्य संयुक्त परिवार की संकल्पना को सुदृढ़ करना तथा स्त्री में निहित सप्त शक्तियाँ – कीर्ति, श्री, वाक, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा — को जागृत कर परिवार एवं समाज निर्माण में नारी की भूमिका को सशक्त बनाना है।”
मुख्य वक्ता श्रीमती सुनीता पांडे ने अपने उद्बोधन में भारतीय परिवार परंपरा, संयुक्त परिवार की महत्ता एवं वर्तमान समय में परिवारों में आ रहे बिखराव पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि —
“नारी में विद्यमान सप्त शक्तियाँ उसे परिवार को सुसंस्कृत व संपन्न बनाने में सक्षम बनाती हैं। सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध, नागरिक कर्तव्य बोध और कुटुंब प्रबोधन — इन पंच परिवर्तनों से भारत पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित होगा।”
उन्होंने कहा कि परिवार केवल “मैं और मेरा” तक सीमित नहीं, बल्कि माता की पाँच और पिता की सात पीढ़ियों का समन्वय ही कुटुंब कहलाता है। विशेष अतिथि सुश्री शशि प्रभा थिटे ने अपाला, मैत्रेयी, सिंधुताई जैसी भारतीय नारियों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि —
“भारतीय नारी जब अपनी शक्तियों को पहचानती है, तो परिवार, समाज और राष्ट्र — सभी प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हैं। नारी ही सृष्टि की जननी है और सशक्त नारी ही सशक्त समाज की पहचान है।”
उन्होंने पन्ना धाय, जीजामाता, हाड़ा रानी जैसी वीरांगनाओं की गाथाओं का उल्लेख करते हुए नारी शक्ति के त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का प्रेरक संदेश दिया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डा. ज्योति चोपड़ा ने कहा कि —
“यह कार्यक्रम केवल आयोजन नहीं, बल्कि नारी शक्ति और सांस्कृतिक चेतना का सजीव संगम है। व्यक्ति निर्माण से ही परिवार एवं समाज निर्माण संभव है।”
आभार प्रदर्शन श्रीमती संध्या शर्मा ने किया।

विशेष आकर्षण :
कार्यक्रम की संकल्पना अनुसार संयुक्त परिवार की वरिष्ठ माताजी श्रीमती प्रतिमा बघेल, देश सेवा में लगे डॉक्टर की माताजी श्रीमती कमला चंद्राकर तथा श्रीमती द्रौपदी चंद्राकर का सम्मान किया गया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। रानी लक्ष्मीबाई, जीजामाता, अहिल्याबाई होलकर एवं तीजनबाई जैसी वीरांगनाओं की वेशभूषा में बालिकाओं ने आकर्षक एवं प्रेरणादायक प्रस्तुतियाँ दीं।
कार्यक्रम अनुभव कथन श्रीमती कृष्णा चंद्राकर एवं श्रीमती निरंजना चंद्राकर ने साझा किए। बालिकाएँ लीना साहू, रानी लक्ष्मीबाई, पूजा साहू, उमेश्वरी नेताम, ऐश्वर्या आदि ने भारत माता की भूमिका में ओजस्वी वक्तव्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन श्रीमती प्रिया राजू सिन्हा (विधायक) द्वारा संकल्प के साथ किया गया।
इस आयोजन को संपन्न कराने में विद्यालय के प्राचार्य श्री देवराज वर्मा, विद्यालय की सप्तशक्ति संगम की सह संयोजिका एवं बालिका विद्यालय की बालिका शिक्षा प्रभारी श्रीमती दुर्गेशनंदिनी चंद्राकर, सुश्री सरोजनी साव, श्रीमती तारनी गोस्वामी, श्रीमती मल्लिका चंद्राकर, श्रीमती किरण सोनी,श्रीमती गुरबारी सोनी, श्रीमती निशा गोस्वामी, श्रीमती उत्तरा सिन्हा, सुश्री टिकेश्वरी चंद्राकर, सुश्री तनुजा साहू, साक्षी घोड़ेचोरे पूर्व छात्राएँ एवं आसपास की महिलाएँ की सहभागिता रही ।
कार्यक्रम का संचालन कन्या भारती अध्यक्ष कु. योगिता ध्रुव ने किया। जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्..।


