राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर रैली सहित अन्य सास्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
September 13, 202213 सितंबर (2007) UNO द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी अधिकार के अवसर पर
भारत में लगभग 705 आदिवासी समुदाय है जिनकी जनसंख्या लगभग 12 करोड़ है। भौगोलिक दृष्टिकोण से भारत के मध्य एवं उत्तरी राज्य में अधिकाधिक संख्या में है। आदिवासी अंचलों में ही देश के प्राकृतिक एवं खनिज संसाधन भरपूर है। भारत के संविधान में आदिवासियों के लिए बहुत सारे अधिकार दिए गए है। आदिवासियों के लिए पांचवीं एवं छटवीं अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन नियंत्रण उनके अनुसार किया गया है। आदिवासी प्राकृतिक पूजक है। आज भी आदिवासी विकास के मानकों में पिछड़ा नजर आता है। जल, जंगल, जमीन और खनिज के संरक्षण के लड़ाई के साथ अपने परंपरा और आदिवासी अस्तित्व के लिए संघर्षरत है भारत राष्ट्र के उत्थान और समग्र विकास की कल्पना आदिवासियों की सहभागिता के
बगैर संभव नहीं है। राष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन एक प्रयास है आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और समस्याओं के निराकरण के लिए। विश्व के आदिवासियों ने अपने अस्तित्व अधिकारों के लिए सन 1923 से (league of nation) लीग ऑफ नेशन के सामने संघर्ष शुरू करके विश्व समाज का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। सन 1982 में इकोनामिक एंड सोशल काउंसिल (ECOSOC) का गठन करके संयुक्त राष्ट्र संघ में विश्व के आदिवासियों के सवालों के समाधान हेतु प्रयास किया। पृथ्वी परिषद के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ में 28 जुलाई 2000 में रेजुलेशन क्रमांक 2000/22 आदिवासियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थाई समिति का गठन किया जिसे हम The United Nation permanent forum on indigenous issue (UNPFII) के नाम से जानते है। सन 2007 ने 13 सितंबर आदिवासियों के लिए अधिकारों की घोषणा की गई और हर साल 13 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी अधिकार दिवस के नाम से मनाया जाता है। आदिवासी समन्वय मंत्र भारत का गठन आदिवासियों के समस्याओं के समाधान के लिए सन 2015 में हुआ जो देश के आदिवासी क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न संगठनों एवं समुदायों का साझा मंच है इस मंच से सन् 2016 में दिल्ली में दयां अंतर्राष्ट्रीय अधिकार दिवस राष्ट्रीय स्तर पर सबको साथ लेकर मनाया था, और महामहिम राष्ट्रपति जी को आदिवासियों के समस्याओं के बारे में ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके बाद देश के विभिन्न प्रदेशों में संगठनों एवं समुदायों को सन 2017 में नागपुर (महाराष्ट्र) सन 2016 में रांची (झारखंड), सन 2019 में मैसूर (कर्नाटक), सन 2020 में में भीतोहा (गुजरात) एवं सन 2021 में दीपू (कार्बी आंगलांग) डिस्ट्रिक्ट ऑटोनॉमस कॉउंसिल देश की सबसे पहली छठवीं अनुसूची के तहत गठित) में आयोजन किया गया इस वर्ष 2022 का अंतरराष्ट्रीय आदिवासी अधिकार दिवस का राष्ट्रीय आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर शहर में आदिवासी सामान्य मंच भारत एवम सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ (रूढ़ीजन्य परंपरा पर आधारित ) के संयुक्तान में आयोजित किया गया



