आदिवासी समाज को अधिकार दिलाने हरसंभव प्रयास कर रही भूपेश सरकार-विनोद.. विश्व आदिवासी दिवस पर क्षेत्रवासियों को संसदीय सचिव ने दी बधाई..

आदिवासी समाज को अधिकार दिलाने हरसंभव प्रयास कर रही भूपेश सरकार-विनोद.. विश्व आदिवासी दिवस पर क्षेत्रवासियों को संसदीय सचिव ने दी बधाई..

August 9, 2022 0 By Central News Service



महासमुंद 09 अगस्त 2022/ संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने विश्व आदिवासी दिवस पर क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि भूपेश सरकार आदिवासियों के हकों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकार देने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।


संसदीय सचिव चंद्राकर ने कहा कि राज्य सरकार का यह प्रयास है कि आदिवासी समाज सहित सभी लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर से बेहतर अवसर उपलब्ध हों और छत्तीसगढ़ की संस्कृति आगे बढ़े, और अधिक समृद्ध राज्य सरकार द्वारा नदी-नालों में वाटर रि-चार्जिंग के लिए नरवा योजना का संचालन वन विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए राज्य सरकार ने मंत्रिमण्डलीय उप समिति एवं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के सचिवों की उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है।

संसदीय सचिव चंद्राकर ने कहा कि जनजातियों की प्राचीन कला और संस्कृति छत्तीसगढ़ की अनमोल धरोहर है। राज्य सरकार आदिवासियों की प्राचीनतम परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों को सहेजते हुए उनके विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। यहां की करीब 31 प्रतिशत आदिवासी जनता और शेष आबादी के बीच की दूरी को कम करते हुए उन्हें मुख्य धारा से जोड़कर आगे बढ़ाने के लिए नए रास्ते खोले गए हैं।

जनजातियों के विकास और हित को ध्यान में रखते हुए भूपेश सरकार ने अपने कार्यकाल में कई अहम फैसले लिये हैं। जिला खनिज न्यास की राशि से आदिवासियों के जीवन स्तर में सुधार, आदिवासी विकास प्राधिकरणों में स्थानीय अध्यक्ष की नियुक्ति, आदिवासी क्षेत्रों में नई प्रशासनिक इकाईयों का गठन के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने जैसे कई प्रयास आदिवासी समाज की बेहतरी के लिए किए गए हैं। आदिवासियों के हितों के लिए गए निर्णयों से उनका जीवन स्तर उपर उठ रहा है। छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस पर सामान्य अवकाश घोषित किया हैै। प्रदेश में पहली बार राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव का आयोजन राजधानी रायपुर में किया गया। इससे सभी लोगों को आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और उनके उच्च जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला है।