बागबाहरा के झोलाछाप डॉक्टरों के ‘नेता’ चेतन कुमार साहू पहुंचे विधायक दरबार में..! ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ झोलाछाप डॉक्टरों का…

बागबाहरा के झोलाछाप डॉक्टरों के ‘नेता’ चेतन कुमार साहू पहुंचे विधायक दरबार में..! ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ झोलाछाप डॉक्टरों का…

October 29, 2026 0 By Central News Service

ग्रामीणों की सेहत से खिलवाड़ की शिकायतों के बीच जांच और कार्रवाई की मांग तेज

महासमुंद/ बागबाहरा छत्तीसगढ़ 29 अक्टूबर 2026 // महासमुंद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के इलाज किए जाने की आशंकाओं ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेंदुकोना क्षेत्र के ग्राम शिकारीपाली में संचालित एक कथित अवैध क्लीनिक को लेकर सामने आए आरोपों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। आरोप है कि चिकित्सा संबंधी वैध डिग्री और दस्तावेजों की पुष्टि के बिना लोगों का इलाज किया जा रहा है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह न केवल स्वास्थ्य नियमों के उल्लंघन का मामला होगा, बल्कि ग्रामीण मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
इस प्रकरण में अरुण मलिक नामक व्यक्ति द्वारा क्लीनिक संचालित किए जाने का आरोप लगाया गया है। वहीं, कथित झोलाछाप चिकित्सकों के एक समूह और उसके बताए जा रहे नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पूरे मामले में चेतन कुमार साहू का नाम कथित ‘यूनियन लीडर’ के रूप में सामने आया है। इसके अलावा नेशनल हाईवे 353 स्थित मेडिकल स्टोर कि आड़ में रमेश कुमार साहू ग्रामीणों का बिना डिग्री के उपचार कर रहे है। इसके साथ मेडिकल स्टोर कि लायसेंस दिखाने पर देश के चौथे स्तंभ एवं तीसरी आंख को मना कर दिया।जो

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस कथित संगठन की वास्तविक भूमिका क्या है, इसके सदस्य कौन हैं और क्या स्वास्थ्य विभाग ने इनके कामकाज तथा चिकित्सकीय योग्यताओं की कभी व्यवस्थित जांच की है?

मामले के अनुसार,हाडाबंद एवं ग्राम शिकारीपाली में मीडिया टीम के पहुंचने पर रमेश कुमार साहू एवं अरुण मलिक से चिकित्सकीय डिग्री और क्लीनिक संचालन से संबंधित वैध दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने अपने पक्ष में एक यूनियन का हवाला देते हुए कहा कि उसका नेतृत्व ग्राम बरबसपुर निवासी चेतन कुमार साहू करते हैं और उनसे संपर्क किया जाए।

यदि यह बातचीत उपलब्ध रिकॉर्डिंग या अन्य साक्ष्यों से प्रमाणित होती है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति द्वारा यूनियन का उल्लेख करना अपने आप में अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित क्लीनिक के पंजीयन, संचालक की योग्यता, उपचार की प्रकृति, दवाओं के इस्तेमाल और उपलब्ध दस्तावेजों की आधिकारिक जांच आवश्यक है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार मरीज नजदीकी उपचार केंद्रों पर भरोसा करके पहुंचते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति आवश्यक योग्यता के बिना गंभीर बीमारियों का इलाज, इंजेक्शन या जोखिमपूर्ण दवाएं देने का काम करता है, तो मरीजों के लिए स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसलिए इस मामले को केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय तथ्यों के आधार पर जांच तक पहुंचाना जरूरी है।

इस पूरे प्रकरण में चेतन कुमार साहू का नाम विशेष रूप से चर्चा में है। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, उन्हें कथित झोलाछाप चिकित्सकों के समूह का नेतृत्व करने वाला बताया गया है। आरोप है कि अरुण मलिक ने मीडिया टीम को दस्तावेजों के संबंध में उनसे संपर्क करने के लिए कहा था।

इसके बाद चेतन कुमार साहू से बातचीत किए जाने का दावा भी सामने आया है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि बातचीत के दौरान उन्होंने मीडिया द्वारा ऐसी गतिविधियों को उजागर किए जाने से होने वाली परेशानी का उल्लेख किया तथा नए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के आने के बाद उनसे मिलने और उनके समक्ष उपस्थित होने की बात कही।

इन कथित बयानों का वास्तविक संदर्भ और अर्थ संबंधित बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग या स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल, चेतन कुमार साहू की कथित नेतृत्वकारी भूमिका की पुष्टि किसी सार्वजनिक या आधिकारिक दस्तावेज से नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में उनका पक्ष जानना और संबंधित यूनियन की वास्तविक स्थिति की जांच करना आवश्यक है।

जांच के प्रमुख सवाल हैं: क्या वास्तव में ऐसा कोई संगठन संचालित है? यदि है, तो उसका पंजीयन, उद्देश्य और सदस्यता क्या है? क्या उसके नाम का इस्तेमाल किसी को चिकित्सकीय योग्यता या क्लीनिक संचालन के नियमों से बचाने के लिए किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

इस मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कथित झोलाछाप चिकित्सकों के समूह से जुड़े कुछ लोगों ने खल्लारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक द्वारिकाधीश यादव से मुलाकात की थी। आरोप यह भी है कि इस मुलाकात का उद्देश्य अपने कारोबार को जारी रखने के लिए राजनीतिक समर्थन प्राप्त करना था।

लेकिन विधायक द्वारिकाधीस यादव ने कहा कि कुछ गांव के डॉक्टर है करके आए थे लेकिन मुझ से मुलाकात नही हुई है। कुछ आवेदन छोड़े है जिसको देखने के बाद मीडिया को बताऊंगा कि क्या मांग है।

विधायक ने यह भी कहा कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हम बर्दाश्त नही करेंगे शासन कि अस्पताल सभी जगहों पर सुचारू रूप से चल रहा है।

हालांकि, इस कथित मुलाकात के उद्देश्य और राजनीतिक संरक्षण के दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। केवल किसी जनप्रतिनिधि से मुलाकात होने के आधार पर संरक्षण या मिलीभगत का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस संबंध में मुलाकात की तारीख, उसमें शामिल व्यक्तियों, चर्चा के विषय और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए।

यदि जांच में किसी व्यक्ति या समूह द्वारा नियमों के विपरीत चिकित्सा गतिविधियों को संरक्षण दिए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका भी कानून के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए।

महासमुंद जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है। दूरस्थ गांवों में रहने वाले मरीज अक्सर समय और आर्थिक परिस्थितियों के कारण नजदीकी उपचार केंद्रों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में चिकित्सकीय योग्यता और वैध अनुमति के बिना इलाज किए जाने की आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

सवाल यह है कि संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण के माध्यम से ऐसे केंद्रों की पहचान कर रहा है या नहीं। यदि शिकारीपाली में क्लीनिक संचालन के दौरान नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो अब तक उसकी जांच क्यों नहीं हुई? क्या क्षेत्र में संचालित अन्य निजी उपचार केंद्रों के दस्तावेजों का भी सत्यापन किया गया है? और शिकायत मिलने पर विभाग की कार्रवाई की प्रक्रिया क्या है..?

इन सवालों के जवाब केवल कागजी निरीक्षण से नहीं, बल्कि मौके पर जाकर जांच करने, संबंधित व्यक्तियों के दस्तावेजों का सत्यापन करने और मरीजों को दिए जा रहे उपचार की प्रकृति की समीक्षा करने से मिल सकते हैं।

इस प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से निम्न बिंदुओं पर जांच किए जाने की मांग उठती है।

1 ग्राम शिकारीपाली में कथित क्लीनिक का तत्काल निरीक्षण कर संचालक की चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन और आवश्यक अनुमतियों की जांच की जाए।

2 अरुण मलिक द्वारा किए जा रहे उपचार की प्रकृति, इस्तेमाल की जा रही दवाओं और मरीजों को दी जा रही सेवाओं की नियमानुसार समीक्षा की जाए।

  1. नेशनल हाईवे 353 स्थित हाडाबंद ओवर ब्रिज के नीचे मेडिकल स्टोर संचालक रमेश कुमार साहू कि डिग्री जहां ग्रामीणों का उपचार किया जाता है, साथ ही मेडिकल स्टोर संबंधित दस्तावेज कि जानकारी। 4.चेतन कुमार साहू की कथित नेतृत्वकारी भूमिका और संबंधित यूनियन के अस्तित्व, पंजीयन तथा गतिविधियों की पुष्टि की जाए।
  2. तेंदुकोना क्षेत्र में संचालित अन्य निजी क्लीनिकों और उपचार केंद्रों का भी आवश्यकतानुसार दस्तावेज सत्यापन किया जाए।
  3. यदि किसी प्रकार की अवैध चिकित्सा गतिविधि या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध लागू कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
  4. जांच के निष्कर्ष और की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि ग्रामीणों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।

जिले के मीडिया रिपोर्ट में हाडाबंद एवं शिकारीपाली का यह मामला अब स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही की कसौटी बन सकता है। एक ओर कथित अवैध क्लीनिक संचालन को लेकर आरोप हैं, तो दूसरी ओर यूनियन के नाम और कथित नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन आरोपों की सच्चाई का निर्धारण किसी बयान या दावे से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और प्रमाणों से होना चाहिए।

चेतन कुमार साहू की कथित भूमिका हो या रमेश कुमार साहू या अरुण मलिक के क्लीनिक का संचालन—इन मामलों में तथ्यात्मक जांच जरूरी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कार्रवाई होनी चाहिए; और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते, तो संबंधित व्यक्तियों को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

अब देखना यह है कि महासमुंद के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। ग्रामीण मरीजों की सुरक्षा, वैध चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

इस मामले में महासमुंद एवं बागबाहरा के स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों को संज्ञान में लाया गया उन्होंने आश्वासन दिया है ऐसी कोई भी अवैध गतिविधि हो रही है तो उस पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। रही बात झोला छाप डॉक्टरों के यूनियन की तो ऐसी कोई भी यूनियन नहीं है और न ही हमारे पास कोई रिकॉर्ड है।