मैदानी अमलों के लिए मिली बोलेरों वाहनों का सीएमएचओ कर रहा निजी उपयोग : विनोद चंद्राकर

मैदानी अमलों के लिए मिली बोलेरों वाहनों का सीएमएचओ कर रहा निजी उपयोग : विनोद चंद्राकर

August 6, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद 06 अगस्त 2026// पूर्व संसदीय सचिव, छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने शासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग को आवंटित 4 नई बोलरों वाहनों के उपयोग को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जुलाई 2025 में ढोल-नगाड़ों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा किया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश भर के स्वास्थ्य विभाग को 151 नए विभागीय वाहन सौंपे थे। कहा गया था कि इन वाहनों से ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी होगी, त्वरित चिकित्सा सुविधा मिलेगी।

प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों तक स्वास्थ्य पहुंचाने के लिए महासमुंद जिले को भी 4 नई बोलेरो वाहन क्रमांक सीजी 02 एयू 2589, 2590, 2591, 2592 दी गईं थी। लेकिन जमीनी हकीकत शासन के दावों से कोसों दूर है। शासन ने बोलेरो तो उपलब्ध करा दी लेकिन उसका नियमित मॉनिटरिंग करना भूल गई। निगरानी के अभाव में विभागीय अधिकारी शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। 

पूर्व संसदीय सचिव ने बताया कि इस मनमानी का सबसे बड़ा उदाहरण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, महासमुंद का कार्यालय है। 22 जुलाई 2025 को संचालनालय द्वारा स्पष्ट आदेश जारी हुआ था कि ये वाहन फील्ड कार्य, निगरानी और आपातकालीन सेवाओं के लिए हैं। 21 नवंबर 2025 को सीएमएचओ कार्यालय ने चालकों की ड्यूटी भी लगा दी। इसका मतलब साफ है कि वाहन, चालक और डीजल सब उपलब्ध है। फिर भी सीएमएचओ ने इन 4 बोलेरो को ब्लॉक स्तरीय नोडल अधिकारियों, बीएमओ और फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं कराया। 

उन्होंने आरोप लगाया कि इन वाहनों का निजी कार्यों में उपयोग हो रहे हैं। इसके चलते पीएम जन-मन योजना के गांवों में स्वास्थ्य शिविर नहीं लग रहे। टीकाकरण प्रभावित हैं, मातृ-शिशु जांच और गंभीर मरीजों को समय पर रेफर नहीं किया जा रहा। ब्लॉक स्तर के अधिकारी वाहन के अभाव में फील्ड पर जाने से लाचार हैं। आज स्थिति यह है कि सरकार का प्रशासनिक अधिकारियों पर कोई अंकुश नहीं है। इसी कारण अधिकारी मनमानी पर उतर आए हैं। सरकारी कार्यों को ठेंगा दिखाकर अधिकारी अपनी मर्जी से कार्य कर रहे हैं। शासन की महती योजना एक अधिकारी की लापरवाही और मनमानी से दम तोड़ रही है। यह सीधे-सीधे जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

उन्होंने सवाल किया कि जब शासन ने वाहन दिए, चालक दिए, तो फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं क्यों नहीं पहुंच रही? सीएमएचओ किसके दबाव में शासकीय वाहनों का निजी उपयोग कर रहे हैं? पूर्व संसदीय सचिव ने मांग की है कि तत्काल उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की जाए। दोषी सीएमएचओ पर कड़ी कार्रवाई हो। सभी आबंटित वाहनों को तत्काल मैदानी उपयोग में लाने के लिखित आदेश जारी हों। मनमानी करने वाले अधिकारी पर सख्त से सख्त कार्रवाई कर वाहनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए।