किसानों को परेशान कर खेती छोड़ने पर मजबूर करने की साजिश रच रही भाजपा सरकार : विनोद चंद्राकर

किसानों को परेशान कर खेती छोड़ने पर मजबूर करने की साजिश रच रही भाजपा सरकार : विनोद चंद्राकर

July 24, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद 25 जुलाई 2026/ पूर्व संसदीय सचिव छग शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने भाजपा की साय सरकार द्वारा एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन के नए नियम को किसानों को परेशान कर उन्हें धान बेचने से वंचित करने की षडयंत्र का एक अभिन्न हिस्सा बताया है। 

चंद्राकर ने कहा कि सरकार द्वारा फार्मर आईडी को कृषि योजनाओं और धान उपार्जन के लिए अनिवार्य करने का फैसला किसानों के साथ किया गया एक सुनियोजित विश्वासघात है। यह कोई सुधार नहीं है, यह एक साजिश है। इस सरकार का मकसद खेती को आसान बनाना नहीं, बल्कि किसान को खेती और मंडी दोनों से बाहर करना है। यह आदेश सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के अन्नदाता को अपमानित करने, परेशान करने और बर्बाद करने के लिए लाया गया है। इस तुगलकी फरमान के बाद अब एक ही परिवार में यदि जमीन संयुक्त नाम से है तो हर एक खाताधारक को अलग – अलग फार्मर आईडी बनवानी पड़ेगी। इसके लिए पूरे परिवार को बार-बार चॉइस सेंटरों और सीएससी केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। जिसके पास दो पहिया तक नहीं है, वह गांव से ब्लॉक और जिला तक दौड़ लगाएगा। एक फार्म के लिए कई बार लाइन में लगना पड़ेगा, दस्तावेज जमा करने पड़ेंगे, सर्वर डाउन का बहाना सुनना पड़ेगा। इस पूरी प्रक्रिया में समय की बर्बादी होगी और जेब से राशि की बर्बादी होगी। सरकार ने सुविधा के नाम पर किसानों के सिर पर एक नया खर्च और नया झंझट थोप दिया है।

पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि सबसे निर्मम प्रहार बुजुर्ग किसानों पर हुआ है। 60, 70 साल की उम्र में जिनके हाथ कांपते हैं, आंखें कमजोर हैं, जिनके अंगूठे घिस गए हैं, उनसे मशीन में अंगूठा मिलान की जिद की जा रही है। जब मशीन में अंगूठा नहीं लगेगा तो ई केवाईसी नहीं होगी, जब ई केवाईसी नहीं होगी तो फार्मर आईडी नहीं बनेगी और जब आईडी नहीं बनेगी तो वह अपना हक का धान भी नहीं बेच पाएगा। क्या सरकार यही चाहती है कि उम्रदराज किसान मंडी की दहलीज से ही लौट जाएं और उनकी फसल को औने-पौने दाम पर बिचौलिए खरीद लें। यह पूरी व्यवस्था जानबूझकर जटिल बनाई गई है ताकि किसान योजनाओं से कट जाएं। उनकी पीएम किसान की किस्त रुकेगी, फसल बीमा नहीं मिलेगा, केसीसी नहीं बनेगा और धान बेचने के लिए टोकन भी नहीं मिलेगा। सरकार की मंशा साफ है। किसानों को परेशान करके उन्हें खेती छोड़ने पर मजबूर करो और फिर उनकी जमीन और मंडी पर अडानी, अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों का कब्जा करा दो।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पूरी तरह किसान, मजदूर, महिला और युवा विरोधी है। इसे गांव और गरीब से कोई लेना-देना नहीं है। यह केवल कॉरपोरेट घरानों के हित में काम करने वाली सरकार है। 

चंद्राकर ने इस जनविरोधी, किसान विरोधी निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मांग की है कि फार्मर आईडी की अनिवार्यता को तुरंत रद्द किया जाए। और सरल प्रक्रिया के तहत सीधे सोसायटी में पंजीयन कर किसानों का एक एक दाना धान समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए।