पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका ने 72 वर्ष कि आयु में ली अंतिम सांस….शोक कि लहर….

पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका ने 72 वर्ष कि आयु में ली अंतिम सांस….शोक कि लहर….

July 5, 2026 0 By Central News Service

रायपुर 05 जुलाई 2026//छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में निधन हो गया। उन्होंने इलाज के दौरान सुबह 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे 72 वर्ष, 2 महीने और 11 दिन की थीं। लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मीं डॉ. तीजन बाई के पिता का नाम हुकुमचंद परधा और माता का नाम सुखवाती बाई था। वे छत्तीसगढ़ की पारधी अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती थीं। बचपन में अपने नाना ब्रजलाल पारधी से महाभारत की कथाएं सुनते-सुनते उन्हें पंडवानी से गहरा लगाव हो गया। बाद में उन्होंने उमेद सिंह देशमुख से इस लोकगायन की अनौपचारिक शिक्षा प्राप्त की।

महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया। उस समय महिलाएं प्रायः बैठकर ‘वेदमती शैली’ में पंडवानी प्रस्तुत करती थीं, लेकिन तीजन बाई ने परंपराओं को तोड़ते हुए पुरुषों के वर्चस्व वाली ‘कापालिक शैली’ को अपनाया। हाथ में तंबूरा लेकर खड़े होकर दमदार आवाज और सशक्त अभिनय के साथ उनकी प्रस्तुति ने पंडवानी को नई पहचान दिलाई।

उनकी असाधारण प्रतिभा को प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने पहचाना, जिसके बाद उनके कला जीवन ने नई ऊंचाइयों को छुआ। उन्होंने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित अनेक विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मॉरीशस समेत 17 से अधिक देशों में पंडवानी का प्रदर्शन कर उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाया।