वीबी–जीरामजी में 300 रु. दैनिक मजदूरी तय कर केंद्र सरकार ने ग्रामीण श्रमिकों के साथ अन्याय किया : विनोद चंद्राकर
July 2, 2026
संपादक मनोज गोस्वामी
महासमुंद 02 जुलाई 2026//छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई 2026 से लागू वीबी–जीरामजी कानून के तहत ग्रामीण श्रमिकों के लिए अधिसूचित दैनिक मजदूरी दर वर्तमान महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुरूप नहीं है। अधिकांश राज्यों में मजदूरी 300 रु. प्रतिदिन निर्धारित करना लाखों ग्रामीण श्रमिकों की वास्तविक जरूरतों की अनदेखी है। आज की परिस्थितियों में यह राशि एक परिवार के सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं कही जा सकती।
चंद्राकर ने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने ‘श्रमिक न्याय’ के तहत मनरेगा सहित सभी श्रमिकों के लिए रु. 400 प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देने की घोषणा की थी। इसके विपरीत केंद्र सरकार ने 300 रु. प्रतिदिन की मजदूरी तय कर यह स्पष्ट कर दिया है कि श्रमिकों की आय बढ़ाना उसकी प्राथमिकताओं में नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गठित डॉ. अनूप सतपथी समिति ने वर्ष 2019 में ही 375 रु. प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी की सिफारिश की थी। इसके बाद महंगाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों की सिफारिशों और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मजदूरी दर में कहीं अधिक वृद्धि अपेक्षित थी। दुर्भाग्य से सरकार ने अपनी ही विशेषज्ञ समिति की महत्वपूर्ण सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया।
चंद्राकर ने कहा कि ग्रामीण विकास संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने भी समय-समय पर ग्रामीण श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाने तथा उसे राज्यों की न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप करने की आवश्यकता पर बल दिया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने ऐसी मजदूरी दर तय की है, जो ग्रामीण आय और उपभोग क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य को पूरा नहीं करती।
जब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की क्रय-शक्ति नहीं बढ़ेगी, तो बाजार में मांग भी प्रभावित होगी और इसका प्रतिकूल असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। वीबी–जीरामजी कानून के तहत रोजगार की अवधि 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करना स्वागतयोग्य कदम हो सकता है, लेकिन इसके साथ 40 प्रतिशत वित्तीय भार राज्यों पर डालना संघीय व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है। इससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाइयाँ आ सकती हैं।
चंद्राकर ने मांग की कि केंद्र सरकार डॉ. अनूप सतपथी समिति की सिफारिशों तथा वर्तमान महंगाई को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी का पुनर्निर्धारण करे। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि आज की परिस्थितियों में राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी कम से कम 500 रु. प्रतिदिन होनी चाहिए। साथ ही वीबी–जीरामजी के तहत मजदूरी को राज्यों की न्यूनतम मजदूरी से जोड़ा जाए, ताकि किसी भी श्रमिक को न्यूनतम निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान न हो।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ग्रामीण श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए अधिसूचित मजदूरी दर की पुनः समीक्षा करे तथा ऐसा निर्णय ले जो श्रमिकों की गरिमा, आजीविका और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वास्तविक मजबूती प्रदान करे।


