दुर्ग में 6 जुलाई को होगा राजपूत समाज का प्रदेश स्तरीय सामूहिक विवाह         6 दूल्हों की बैंडबाजे के साथ एक साथ निकलेगी बारात, फिजूलखर्ची पर लगेगा अंकुश

दुर्ग में 6 जुलाई को होगा राजपूत समाज का प्रदेश स्तरीय सामूहिक विवाह 6 दूल्हों की बैंडबाजे के साथ एक साथ निकलेगी बारात, फिजूलखर्ची पर लगेगा अंकुश

July 1, 2026 0 By Central News Service

दुर्ग | राजपूत समाज में बढ़ते आडंबर और फिजूलखर्ची को रोकने के उद्देश्य से राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ द्वारा 6 जुलाई 2026, सोमवार को दुर्ग में प्रदेश स्तरीय सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है।

महासभा की पंजीयन क्रमांक 1282 के तत्वाधान में उप समिति दुर्ग यह आयोजन महाराणा प्रताप मंगल भवन, शंकर नगर दुर्ग में करेगी। कार्यक्रम में कुल 6 जोड़ों का विवाह एक साथ संपन्न कराया जाएगा।

कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल
महासभा के प्रचार सचिव एवं मीडिया प्रभारी डॉ. जितेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि विवाह समारोह प्रात: 7:30 बजे मंडपाछादन के साथ शुरू होगा। संध्या 5:00 बजे दीवा लग्न में पानीग्रहण संस्कार किया जाएगा। विवाह के तुरंत बाद 6 दूल्हों की बारात बैंडबाजे के साथ धूमधाम से निकाली जाएगी।

बारातियों और मेहमानों के लिए भोजन, रुकने और बैठने की समुचित व्यवस्था समिति द्वारा की गई है।

अध्यक्षता करेंगे ठा. बजरंग सिंह बैस
कार्यक्रम की अध्यक्षता महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष ठाकुर बजरंग सिंह बैस करेंगे। इस पावन मंगल परिणय बंधन के अवसर पर समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर नव-दम्पतियों को आशीर्वाद देने की अपील की गई है।

ये रहेंगे मौजूद
आयोजन को सफल बनाने की अपील करने वालों में वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह राजपूत, उपाध्यक्ष पंकज कुमार भुवाल, कोषाध्यक्ष नीरज सिंह क्षत्रिय, महासचिव अशोक ठाकुर, सामूहिक विवाह प्रभारी सत्येंद्र सिंह राजपूत, उप सचिव घनश्याम सिंह चौहान, संगठन सचिव अजय सिंह, महिला अध्यक्ष श्रीमती रश्मि राजपूत, महिला सचिव श्रीमती मधुबाला सिंह, युवा अध्यक्ष अनुराग सिंह और युवा सचिव महेंद्र सिंह शामिल हैं।

उप समिति दुर्ग की ओर से अध्यक्ष ठाकुर नरेंद्र सिंह, सचिव दीपक सिंह, महिला अध्यक्ष बिंदु भुवाल सहित दुर्ग जोन के सभी पदाधिकारी, युवा मंडल एवं महिला मंडल के सदस्य कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

महासभा का कहना है कि इस तरह के सामूहिक विवाह से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी सम्मान के साथ बेटी ब्याहने में मदद मिलेगी और दिखावे की संस्कृति पर रोक लगेगी।