जल जीवन मिशन में बड़ी लापरवाही: ‘मामा भांचा’ में 3 साल बाद भी प्यासी है पानी टंकी, करोड़ों खर्च फिर भी ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को मोहताज
May 27, 2026संपादक मनोज गोस्वामी
बागबाहरा 27 मई 2026/ केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा के ग्राम पंचायत मामा भांचा में विभागीय लापरवाही और ठेकेदारी की सुस्ती की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ योजना के नाम पर कागजों में तो लाखों रुपये बहा दिए गए और पानी टंकी भी खड़ी कर दी गई, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बीते 3 साल बाद भी इस टंकी तक पानी पहुंचाया ही नहीं जा सका है। नतीजा यह है कि करोड़ों की योजना सफेद हाथी साबित हो रही है और ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं।
₹1.31 करोड़ की योजना, ₹1 करोड़ से अधिक का भुगतान… फिर भी काम बंद!
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ग्राम मामा भांचा में ‘सिंगल विलेज स्कीम’ (SVS) के तहत पाइपलाइन और जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ₹131.82 लाख (1.31 करोड़ से अधिक) की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। हैरानी की बात यह है कि इस काम के लिए अब तक ₹101.81 लाख (1 करोड़ 1 लाख रुपये से अधिक) की राशि ठेकेदार/एजेंसी द्वारा निकाली जा चुकी है।
विभागीय रिकॉर्ड में इस कार्य को “प्रगति पर” (Ongoing) दिखाया जा रहा है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब 75% से अधिक की राशि का भुगतान हो चुका है, तो तीन साल बीत जाने के बाद भी पानी घर-घर क्यों नहीं पहुंचा?
टंकी तैयार, पाइपलाइन गायब: सिर्फ कागजों में 247 कनेक्शन
सरकारी दावों की मानें तो मामा भांचा गांव के 256 परिवारों में से 247 घरों में नल कनेक्शन दे दिया गया है। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह दांवा पूरी तरह खोखला है। गांव में पानी की टंकी तो बनाकर खड़ी कर दी गई है, लेकिन मुख्य सोर्स से टंकी तक पानी चढ़ाने और उसे घरों तक सप्लाई करने की व्यवस्था भगवान भरोसे है। अधिकारियों और ठेकेदार की जुगलबंदी के कारण यह पूरी योजना बंद पड़ी हुई है।
जनप्रतनिधि और अधिकारी मौन
इस योजना की निगरानी समिति (VWSC) के मुख्य पदाधिकारी भी हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर ठेकेदार पर काम पूरा करने का कोई दबाव नहीं बनाया जा सका। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के जिम्मेदार अफसर भी दफ्तरों में बैठकर सिर्फ कागजी प्रोग्रेस रिपोर्ट देखकर संतुष्ट हैं, जबकि जमीनी स्तर पर जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान है।
ग्रामीणों ने अब प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए, बंद पड़े काम को तत्काल चालू कराया जाए और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले ठेकेदार व लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
एक नज़र में ‘मामा भांचा’ जल मिशन का सच:
कुल स्वीकृत राशि: ₹131.82 लाख
अब तक आहरित (निकाली गई) राशि: ₹101.81 लाख
कागजों में नल कनेक्शन: 247
ज़मीनी हकीकत: टंकी तैयार, लेकिन सप्लाई पूरी तरह बंद!



