पंगत और संगत सामाजिक सद्भाव के दो सशक्त स्तंभ – कौशलेंद्र….महासमुन्द में ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ संपन्न58 समाजों के प्रबुद्धजनों ने लिया सामाजिक समरसता का संकल्प

पंगत और संगत सामाजिक सद्भाव के दो सशक्त स्तंभ – कौशलेंद्र….महासमुन्द में ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ संपन्न58 समाजों के प्रबुद्धजनों ने लिया सामाजिक समरसता का संकल्प

April 14, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद 14 अप्रैल 2026/ नगर में आज एक ऐतिहासिक ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के 58 विभिन्न समाजों के प्रबुद्धजनों ने एकजुट होकर सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रांत सामाजिक सद्भाव प्रमुख श्री कौशलेंद्र प्रताप उपस्थित रहे। ​बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों, धर्मांतरण जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए आपसी प्रेम, भाईचारा और सामाजिक एकता को और अधिक सुदृढ़ करना था।

कार्यक्रम का प्रारंभ भारत माता के छाया चित्र में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथि परिचय चन्दन डड़सेना द्वारा कराया गया। सामाजिक सद्भाव बैठक की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए भूपेन्द्र राठौड़ ने कहा कि “आज का समय सामाजिक चुनौतियों का है। धर्मांतरण, सामाजिक कुरीतियां, और हमारे आपसी सौहार्द में दरार डालने वाली परिस्थितियां, हमसे आज एक प्रश्न पूछ रही हैं कि “क्या हम अपने राष्ट्र की नींव को सुरक्षित रखने के लिए तैयार हैं?” आज की यह ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ इसी प्रश्न का उत्तर है। ​हमारे ऋषियों ने कहा है – ​’संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्’ अर्थात् हम साथ चलें, साथ बोलें, और हमारे मन एक समान हों। जैनेन्द्र चन्द्राकर द्वारा “धरम ध्वजा हाथ में, सब समाज साथ में, एकता के मंत्र हम गुंजाबो, भारत ल विश्व गुरु बनाबो” गीत प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर समाज प्रमुखों द्वारा अपने-अपने समाज में किए गए उत्कृष्ट कार्य और समाज में हुए सकारात्मक परिणाम की जानकारी दी। सभी ने सामाजिक कुरीतियां समाप्त कर समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा, सौहार्द एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि कौशलेंद्र प्रताप ने कहा कि, “भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है। समाज में जब 58 समाज एक मंच पर बैठकर संवाद करते हैं, तो कोई भी भ्रांति या विभाजनकारी शक्ति हमारे बीच दूरी नहीं बना सकती। हमें अपने समाज की सुरक्षा और समाज के विकास के प्रति सदैव सजग रहना होगा।” उन्होंने कहा कि “पंगत हमें ‘समानता’ सिखाती है और संगत हमें ‘संस्कार’। जब पंगत में प्रेम का स्वाद और संगत में राष्ट्रवाद का विचार मिल जाता है, तब समाज में ‘सामाजिक सद्भाव’ का निर्माण होता है।” मुख्य अतिथि ने कहा कि ‘समाज की चुनौतियों का समाधान एक बार की बैठक में नहीं होता, बल्कि यह निरंतर संवाद की प्रक्रिया है। हमारा यह बैठक आज समाप्त हो जाएगा लेकिन हमारा ‘मिशन सद्भाव’ आने वाले समय में और अधिक प्रवाह के साथ गतिमान हो ऐसा उपक्रम करना होगा।” इस सद्भाव बैठक में क्षत्रिय राजपूत समाज, ब्राह्मण समाज, ध्रुव गोंड समाज, रावत समाज, वैष्णव समाज, गोस्वामी समाज, सिन्हा कलार समाज, कोलता समाज, अघरिया समाज, गांड़ा समाज, सिख समाज, सतनामी समाज, मराठा समाज, मरार पटेल समाज, साहू समाज, धोबी कन्नौजे समाज, निषाद समाज, सेन नाई समाज, जैन समाज, माहेश्वरी समाज, चन्द्राकर कुर्मी समाज, कुम्हार समाज, वर्मा समाज, पटवा नामदेव, कसार समाज, कायस्थ समाज, रविदास समाज, गुजराती समाज, वाल्मीकि समाज, उत्कल समाज, सोनी स्वर्णकार समाज, सोनकर समाज, देवार समाज सहित 58 समाज प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

​कार्यक्रम का संचालन उमेश भारती गोस्वामी और आभार प्रदर्शन राजेश डड़सेना ने किया। राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम् के सामूहिक गान से साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। महासमुन्द में एकता का एक नया अध्याय लिखते हुए “पंगत व संगत” की अवधारणा को सार्थकता प्रदान करते सभी समाज के प्रतिनिधियों ने एक मंच पर सामूहिक भोजन ग्रहण किया।


इस अवसर पर यज्ञराम सिदार, महेश चन्द्राकर, भगोली राम साहू, घनश्याम सोनी, ठाकुर राम, दयामणि सिदार, नीलेश पटेल, गोवर्धन प्रधान, संतोष ध्रुव, गुलाब सेन, राधेश्याम सोनी, रामेश्वर गन्नू साहू, मिथिलेश बोयर, प्रांशु चंद्राकर, सुदेश कन्नौजे, चन्द्रहास चन्द्राकर, द्वारिका चन्द्राकर, टेकराम सेन, ढालू राम साहू, किरण कन्नौजे, राजेश शर्मा, पवन पटेल, महेंद्र जैन, बसंत लुनिया, मुकेश श्रीवास्तव, खेमूराम सोनकर, दीप अग्रवाल,भागवत जगत भूमिल, रेखा तांडी, उत्तरा प्रहरे, सरदार सुमित सिंह, दानेश्वर सिन्हा, श्रेयांश चोपड़ा, गोवर्धन प्रधान, नारायण सिंह, जयराम पटेल, नैना श्रीवास्तव, संजना नामदेव, ज्योति लड्ढा, राहुल चन्द्राकर, पप्पू पटेल, गोपी कन्नौजे, मेघराज चन्द्रसेन, डी सी राव भोसले, गुरजीत सिंह चावला, खिलावन यादव, भरत सिंह कसार, बुद्धेश्वर सोनवानी, प्रदीप वर्मा, खगेश्वर पटेल, अशोक चक्रधारी, सुरेन्द्र दास, सितेश सोनी, फकीर सोनी, देवदत्त चंद्राकर, संजीव कुमार राजा, खिलावन मेहरा, सुरेन्द्र वैष्णव, भीखम ठाकुर, मनोहर महंती, राजेश प्रजापति, हुलसी चन्द्राकर, कल्पना सिन्हा, राजेन्द्र राव घाडगे, राजू मिर्धा, दीपक तिवारी, उत्तम वर्मा, चंदा टावरी, अनिता सिन्हा, सहित 58 समाज के 162 समाज प्रमुखों की उपस्थिति रही। बैठक में उपस्थित सभी समाजों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में सामाजिक समरसता बनाए रखने का संकल्प लेते हुए प्रति तीन माह में एक बार इस तरह का बैठक रखने की बात कही। सभी ने प्रण किया कि वे अपने-अपने स्तर पर आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश प्रसारित करेंगे और राष्ट्र की अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेंगे।


उक्ताशय की जानकारी सामाजिक सद्भाव आयोजन समिति की ओर से राजेश डड़सेना व चन्दन डड़सेना ने दी।