सहनशीलता और समझदारी से होगा आत्मा का कल्याण : मनीष सागर जी महाराज

सहनशीलता और समझदारी से होगा आत्मा का कल्याण : मनीष सागर जी महाराज

September 22, 2025 0 By Central News Service

जागृति बढाकर सहनशीलता का गुण विकसित करें

रायपुर। आत्मा के कल्याण के लिए सहनशीलता और समझदारी आवश्यक है। जब दोनों जुड़ जाते हैं तो काम सही होता है। हमारे अंदर सहनशीलता का गुण होगा तो पुराने कर्म बंधन के उदय का सामना कर सकेंगे। नए कर्म बंधन से बच सकते हैं। ये सीख सोमवार को टेगौर नगर पटवा भवन में जारी चातुर्मासिक प्रवचनमाला में परम पूज्य उपाध्याय भगवंत युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने दी।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि
सहनशील व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में अपना आनंद नहीं खोता। विपरीत परिस्थितियों में शांत रहते हुए अपना समाधान खोज लेता है। समस्या कितनी भी बड़ी हो समाधान किया जा सकता है। इसके लिए समझदारी और सहनशीलता का गुण होना चाहिए। समस्या में सहनशीलता कवच का काम करेगी। समाधान के बतौर समझदारी तलवार का काम करेगी। आप दोनों के बल पर जीवन का युद्ध जीत जाओगे। आपको बाहर के प्रभाव का सहनशीलता का कवच बचाएगा। अंदर की समझदारी समाधान निकाल लेगी।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि सहनशील होने के लिए शांति नहीं खोना है। सहनशीलता का दूसरा नाम क्षमा है। प्रतिकूल परिस्थिति में सहनशीलता आवश्यक है। प्रतिकूलता में जीना सीखना होगा। मन को सदैव शांत रखना है। मोक्ष कभी अनुकूलता की राह में नहीं होगा। परमात्मा के मार्ग में रहना है तो प्रतिकूल परिस्थिति में जीना आना ही चाहिए। जो व्यक्ति सहन नहीं कर सकता वह लंबे समय तक अशांत रहता है। अशांत व्यक्ति सही निर्णय नहीं ले पाता। गुमराह हो कर जीवन में फंस जाता है। शांत रहने के लिए सहनशीलता का गुण आवश्यक है।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि सहनशीलता का गुण भीतर के संदेह को दूर करने पर ही आएगा। शांत रहना पहली प्राथमिकता है। शांत रहने का साधन सहनशीलता है। जीवन में कभी अशांत नहीं होना है। जीवन में आनंद,शांति,समता होनी चाहिए। राग व द्वेष नहीं करना प्राथमिकता होना चाहिए। सहनशीलता उलझन की दिशा में पहला कदम है। जिंदगी में कई परिस्थितियों आएंगी। सहनशीलता का गुण विकसित करना होगा। इससे जीवन में सुख और शांति बनी रहेगी।