पहले पात्र बनो फिर कार्य करो : मनीष सागर,जिसका खुद पर नियंत्रण होगा, वह जीवन में भटकेगा नहीं
September 6, 2025रायपुर। टैगोर नगर पटवा भवन में जारी चातुर्मासिक प्रचवनमाला में शनिवार को परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने पात्रता हासिल करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य करने से पूर्व पात्रता आवश्यक है। कुछ लोग सोचते हैं कार्य करने के बाद पात्रता आ जाएगी। कार्य तभी सफल होगा जब पात्रता होती है। शिक्षा प्राप्त करने के पहले शिष्टता चाहिए। शिष्टता नहीं होगी तो शिक्षा प्राप्त नहीं होगी। व्यवहार कुशलता नहीं होगी तो व्यापार में भी निष्फल हो जाओगे।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि भगवान की आज्ञा में जीना है ये अच्छी बात है। इससे पहले माता-पिता की आज्ञा में जीने की पात्रता होनी चाहिए। जो माता-पिता की आज्ञा में जी नहीं पाएगा, वह कुछ नहीं कर पाएगा। यदि भगवान मिल भी जाए तो भगवान की आज्ञा में जी नहीं पाएगा। यह पात्रता, योग्यता है। व्यापार सीखने के लिए बड़ी-बड़ी डिग्री ले लोगे लेकिन आपने व्यवहार कुशलता नहीं सीखी तो कुछ नहीं होगा।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि
जो क्रम से आगे बढ़ता है उसे कठिनाइयां नहीं आती है।।पहले पात्रता हो फिर कार्य हो यह नियम है। प्रवचन में आ रहे हो तो मन में भाव हो। मन में जिज्ञासा हो। पहले जिज्ञासा हो फिर श्रवण हो। जिज्ञासा के बगैर श्रवण होगा तो कार्यकारी नहीं होगा। जिज्ञासा बहुत हो और श्रवण कम हो तो भी कार्य हो जाएगा। यदि श्रवण ही श्रवण हो लेकिन जिज्ञासा नहीं हो तो सब व्यर्थ हो जाएगा।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि संसार में लोगों को भीतर में हमेशा भय सताता रहता है। भोग में इतना डूब जाते हैं की इच्छाएं और तीव्र हो जाती है। भोग विलासिता से पूर्ण जीवन मन को लगातार कमजोर करता रहता है। कर्म बंधन बढ़ाते हैं। मन से विचलित नहीं होना है तो सतर्क रहना होगा। कई लोग ठोकर खाकर संभल जाते हैं। कई लोग ठोकर खाने के बाद भी संभाल नहीं पाते। मन और विवेक को जागृत रखें। देखें स्व पर नियंत्रण जिसका होगा वह व्यक्ति जीवन में भटकेगा नहीं। हमेशा सुधार का प्रयास करने के लिए तत्पर होना चाहिए।


