भीतर का भाव और बाहर का व्यवहार हमेशा अच्छा रखें : मनीष सागर ,जीवन की हर परिस्थितियों का खुशमिजाज होकर स्वागत करें

भीतर का भाव और बाहर का व्यवहार हमेशा अच्छा रखें : मनीष सागर ,जीवन की हर परिस्थितियों का खुशमिजाज होकर स्वागत करें

September 2, 2025 0 By Central News Service

रायपुर। टैगोर नगर पटवा भवन में जारी चातुर्मासिक प्रचवनमाला में मंगलवार को परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने भावों और व्यवहार को सदैव अच्छा रखने की सीख दी। उन्होंने कहा कि जीवन में भीतर के भावों को नहीं बिगाड़ना है। बाहर के व्यवहार को हमेशा अच्छा रखना है। इसके प्रति हमेशा चौकन्ना रहना है। राग को छोड़ने का आधार ज्ञान है। ज्ञान सभी के भीतर है। बस देव,गुरु और धर्म से जुड़कर इशारे को समझने की आवश्यकता है।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि जीवन की प्रत्येक परिस्थिति एक परीक्षा है। इस परीक्षा में अपनी समझ का उपयोग करना होगा। तभी हम इस परीक्षा का सुखद परिणाम हासिल कर सकते हैं। सुबह से शाम तक अनेक प्रसंग हमें मिलते हैं। हर प्रसंग,हर परिस्थिति को देखने का नजरिया है। ऐसा नहीं हो कि यह सामान्य है रहने दो। इस तरह हम नजरअंदाज नहीं कर सकते।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि कैसी भी परिस्थितियों में दो सफलता पाना है। पहले बाहर में व्यवहार अच्छा निभाना है और भीतर में भाव अच्छा रखना है। जीवन में असली परीक्षा भावों की है। व्यवहार अच्छा रखना हमारी जवाबदारी है। हमें जीवन की हर परिस्थिति को परीक्षा की तरह लेना होगा। यह हमारे आत्म कल्याण की परीक्षा है। हम चाहे तो आत्मा का कल्याण भी कर सकते हैं और आत्मा का पतन भी कर सकते हैं। जितना हो सके अपने भावों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि अभाव में भी उपलब्धियां आ जाए, ऐसा जीवन होना चाहिए। जीवन की परीक्षाओं में जो भी चुनौतियां आएगी उससे घबराना नहीं है। हमेशा खुशमिजाज होकर स्वागत करना है। मनोबल गिराना नहीं है। एकाग्रता हमेशा की आवश्यक है। संसार में बाहर के फायदे तो बहुत हैं। भीतर के फायदे का अवसर हमेशा है। प्रतिकूलता में भावों को विचलित नहीं होने देना चाहिए।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि जीवन का प्रत्येक प्रसंग एक परीक्षा है। परीक्षा में हमें संतुलन रखना है। बाहरी सफलता के साथ आंतरिक सफलता की हमेशा जागृति रखना है। जीवन से हमें शिकायत नहीं रखना चाहिए। क्या नहीं मिला उसे मत देखिए क्या मिला है उसे देखकर उसका उपयोग करना चाहिए। अभाव में भी उपलब्धियां हासिल हो सकती है।