सभी वर्गो के लिए बजट निराशाजनक : देवेंद्र

सभी वर्गो के लिए बजट निराशाजनक : देवेंद्र

March 7, 2023 0 By Central News Service

संपादक मनोज गोस्वामी

महासमुंद 07 मार्च 2023/ भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के जिला संयोजक देवेंद्र चंद्राकर ने कहा कि तुष्टिकरण की नीति के तहत राज्य सरकार का बजट पेश हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बतौर वित्तमंत्री ने अपने कार्यकाल के अंतिम बजट प्रस्तुत किया। बजट में एक प्रकार से तुष्टिकरण की नीति नजर आती है।

वहीं अनियमित कर्मचारियों की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय उनके मानदेय में मामूली बढ़ोतरी कर तुष्टिकरण का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पिछला बजट जहां एक लाख चार हजार पांच सौ करोड़ रुपए का था, तो साल 2023-24 के लिए एक लाख बत्तीस हजार तीन सौ सत्तर करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि है, जो महंगाई दर की तुलना में आधे से तीन प्रतिशत ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत बजट में कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते का उल्लेख नहीं है। इस बजट में किसान, मजदूर के साथ अन्य वर्गों योजनाओं का उल्लेख किया गया है, लेकिन राज्य सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई राहत-भत्ते के भुगतान के लिए बजट प्रावधान का कोई उल्लेख नहीं है। प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों की आशा घोर निराशा में बदल गई।

इस बजट में विधवा महिलाओं की आंख से अश्रुधारा बहती नजर आ रही है। अनुकंपा नियुक्ति की आस पर पानी फिरने के बाद अब महिलाएँ इच्छा मृत्यु की माँग कर रही हैं। विधवा महिलाएं सामूहिक रूप से मुंडन करवा रही हैं।

देवेंद्र चंद्राकर ने कहा कि यह बजट अनियमित कर्मचारियों के लिए निराशाजनक बजट है। कांग्रेस सरकार का अंतिम बजट प्रदेश के लाखों अनियमित कर्मचारी, संविदा, दैनिक वेतन भोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, प्लेसमेंट, मानदेय, अशंकालिक, जाबदर, ठेका के निराशा जनक एवं पीड़ा देने वाली बजट है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ वर्गों के अनियमित कर्मचारियों जैसे आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता-सहायिका, रसोइया, स्कूल सफाई कर्मचारियों के मानदेय में न्यूनतम वृद्धि करने एवं मितानिनों को अतिरिक्त 2200 रु. देने की घोषणा की गई है। शेष अनियमित कर्मचारियों के लिए कुछ नहीं है।

चंद्राकर जी ने कहा कि जन आकांक्षा की अभिव्यक्ति में यह बजट असफल रहा। सरकार का जीडीपी विकास दर 12.6% का अनुमान तथा प्रतिव्यक्ति आय में लगभग 11% वृद्धि का दावा जरूर है, किंतु स्वयं सरकार के द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े यह बताते हैं कि प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ा है। आय असमानता बढ़ीं है, और प्रदेश की 73% आबादी अभी भी गरीबी रेखा सीमा से नीचे जीवन यापन करने बाध्य है। इसके लिए रोजगार के अवसर तथा आम लोगों की आमदनी में वृद्धि के पर्याप्त उपाय नहीं की गई है।

देवेंद्र ने आगे कहा कि सरकार ने बेरोजगारी भत्ते की बात तो की किंतु उसके लिए परिवार की आमदनी के लिए 2.50 लाख की सीमा लगा दी और वह भी अधिकतम दो वर्ष के लिए 2500 रुपए प्रतिमाह की शर्त जोड़ दी इससे बड़ी संख्या में पात्र इससे वंचित हो जायेंगे। जबकि आंकड़े यह बताते हैं कि 19 लाख से अधिक केवल पंजीकृत बेरोजगार हैं। इसी तरह निराश्रित बुजुर्ग, दिव्यांग, विधवा, परित्यकता की मासिक पेंशन में मात्र 150 रुपए, मध्यान्ह भोजन के रसोइए के मानदेय में मात्र 300 रुपए, स्कूल सफाई कर्मियों के मानदेय में मात्र 300 रुपए की मासिक वृद्धि की गई है, जबकि मध्यान्ह भोजन कमिर्यों के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उन्हे प्रतिदिन 392/ पारिश्रमिक दिए जाने का निर्णय दिया है। इस प्रकार कुल मिलाकर यह बजट निराशाजनक रहा है।