विजयादशमी उत्सव … देश की रक्षा के लिए संकल्पित है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – सहदेव

विजयादशमी उत्सव … देश की रक्षा के लिए संकल्पित है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – सहदेव

October 17, 2022 0 By Central News Service

महासमुंद 17 अक्टूबर 2022/ “जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने गिरि वासियों, वनवासियों को संगठित कर अधर्म और अन्याय के प्रतीक रावण का संहार कर धर्म व सज्जन शक्ति को स्थापित किया। उसी प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिन्दू समाज के सज्जन शक्तियों को जागृत कर संगठित करने का कार्य करते हुए देश की रक्षा के लिए संकल्पित है।” उक्त उद्गार थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महासमुन्द द्वारा आयोजित विजयादशमी उत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष सहदेव ध्रुव जी के।

कार्यक्रम का प्रारंभ स्वयंसेवकों द्वारा नगर में पथसंचलन के साथ हुआ। भारत माता के छाया चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन व शस्त्र पूजन के पश्चात् स्वयंसेवको द्वारा नि: युद्ध, भूमि वंदन, यष्टि प्रयोग और समता का प्रदर्शन किया गया। सुभाषित, अमृत वचन, एकल गीत के पश्चात मुख्य वक्ता राजिम विभाग के प्रचारक ठाकुर राम जी ने कहा “हमारी धर्म और संस्कृति कितना भी श्रेष्ठ क्यों ना हो जब तक हमारे पास शक्ति नहीं उसका कोई औचित्य नहीं है। निर्बल शक्ति को कोई नहीं मानता, इसलिए बकरे के बच्चे की बलि दी जाती है, शेर या हाथी की नही। शक्ति में सामर्थ्य होनी चाहिए। हमारे पूर्वज हमारी संस्कृति के संवाहक हैं। हमारा इतिहास संघर्षों का इतिहास है। हमें अपनी विरासत को संजोए रखना है, शास्त्र और शस्त्र की शक्ति को पहचानना है जहां शक्ति होती है वही शांति होती है।”

विभाग प्रचारक ने आगे कहा “त्रेता युग में मंत्र शक्ति, सतयुग में ज्ञान शक्ति तथा द्वापर में युद्ध शक्ति प्रमुख बल था, किन्तु कलियुग में संगठन की शक्ति ही प्रधान है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन शक्ति के बल पर आज विश्व का सबसे बड़ा बलशाली, पराक्रमी, विजयशाली और विजुगिषु प्रवृत्ति जगाने वाला संगठन है। हमें आधा श्लोक पढ़ाया जाता है “अहिंसा परमो धर्मः” परन्तु उसके आगे की बात नहीं बताई जाती “अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च” अर्थात धर्म स्थापना के लिए हिंसा किया जाए तो वह पाप नहीं है।

श्रीराम ने सामाजिक समरसता के लिए शबरी के जूठे बेर खाए। श्री कृष्ण ने माखन चोरी कर ग्वाल बालों को खिलाया। गुरु घासीदास ने “मनखे मनखे एक समान” का नारा देकर समाज को जोड़ने का प्रयास किया। आज संघ स्थापना दिवस है, आज से 97 वर्ष पूर्व डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने नागपुर के मोहिते बाड़ा में संघ की स्थापना की। उन्होंने देखा कि भारत के पास न तो संसाधनों की कमी है और न ही शक्ति का, फिर भी भारत गुलाम है। उन्होंने पाया कि लोगों में देशभक्ति की भावना और संगठन शक्ति का अभाव है।

वे भारत को परम वैभव के शिखर में पहुंचाकर विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना चाहते थे। वे खोई हुई हिन्दू संस्कृति और हिन्दू संस्कार को वापस लाना चाहते थे। संघ स्थापना के पीछे यही मूल उद्देश्य था। आज हमारे सामने मतांतरण सामाजिक समरसता, पर्यावरण, ग्राम विकास, परिवार प्रबोधन जैसी अनेक चुनौतियां है। उन्होंने समाज को आह्वान करते हुए कहा कि “सर्वे भवन्तु सुखिन: एवं वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को लेकर हिन्दुत्व का भाव मन पैदा करें और आने वाले संकटों का डटकर मुकाबला करें।”

इस अवसर पर माननीय जिला संघचालक महेश चन्द्राकर, नगर संघचालक भूपेन्द्र राठौड़, प्रांत व्यवस्था प्रमुख घनश्याम सोनी, पूर्व राज्य मंत्री पूनम चन्द्राकर, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, चन्द्रहास चन्द्राकर, संदीप दीवान, मोती साहू, प्रदीप चन्द्राकर, निरंजना शर्मा, संध्या शर्मा, राजश्री ठाकुर, येतराम साहू, संदीप घोष, प्रेम चंद्राकर, डॉ.संजीव, देवेन्द्र चंद्राकर एवं समवैचारिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित गणमान्य नागरिक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग, जिला, नगर व खंड के पदाधिकारी और स्वयंसेवक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
उक्ताशय की जानकारी नगर के प्रचार प्रमुख चन्द्रशेखर साहू ने दी।