चुनाव आयुक्त को बचाने पूरी भाजपा बेचैन आखिर क्यों ? अंकित

चुनाव आयुक्त को बचाने पूरी भाजपा बेचैन आखिर क्यों ? अंकित

November 3, 2026 0 By Central News Service

बागबाहरा 03 नवंबर 2026//कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अंकित बागबाहरा वोट बचाओ देश बचाओ महारैली से दिल्ली से लौटने के बाद बताया कि आज जो चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं और गड़बड़ियां पकड़ाए जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने से भाजपा इतनी क्यों किलबिला रही है ये पूछने वाला सवाल है ?


अंकित ने बताया की 2024 जनवरी तक ज्ञानेश कुमार केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के साथ सहकारिता सचिव थे उसके तत्काल बाद उन्हें मार्च 2024 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त बना दिया गया, उनको बनाने के पहले से षड्यंत्र शुरू था उससे जुड़े कुछ ज्वलंत सवाल :-

1) जनवरी 2018 से मशीन रिडेबले वोटर लिस्ट देना बंद क्यों कि गयी ?
2) देश के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री तक के खिलाफ एफआईआर हो सकती है, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रहते हुए और रिटायर होने के बाद भी उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का दीवानी और आपराधिक कार्यवाही क्यों नही हो सकती ? इसके लिए दिसंबर 2023 में अधिनियम की धारा 16 में परिवर्तन करने की जरूरत क्या थी ?
3) मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ महाअभियोग की प्रक्रिया को संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के तहत पेचीदा क्यों किया गया ?
4) मुम्बई हाई कोर्ट ने जब अमरावती लोकसभा से संबंधित वीडियो फुटेज व रिकॉर्ड देने कहा तो कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग की सलाह पर इसे गोपनीय श्रेणी में डालकर देने से मना क्यों किया ?
5) sir की प्रक्रिया का भाजपा ने बखान कर कहा था इससे विदेशी घुसपैठिये और बांग्ला देशी को पकड़ेंगे अब तक 13 करोड़ नाम काटे उसमें मात्र 1600 विदेशी का नाम ही दे पाए वो भी अधिकतर नेपाली का तो मतलब विदेशी घुसपैठिये नही मीले क्या ?
6) ज्ञानेश कुमार के बनने के 10 महीनों में अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार उनके क्रिया कलाप पर आपत्ति की तो क्या ज्ञानेश कुमार के बनने के बाद देश मे जितने चुनाव हुए या अन्य राजनीतिक दलों को तोड़ा गया उसे अवैध घोषित नही कर देना चाहिए ?
7) चुनाव आयोग द्वारा विधानसभा स्तर पर बनाये जाने वाले ईआरओ से नाम जोड़ने व घटाने का पावर ले कर सीधे दिल्ली से करते थे, ऐसा क्यों ?
8) नाम काटने का आवेदन स्वयं चुनाव आयोग किसके कहने पर और क्यों कंप्यूटर जनरेटेड देता था साथ ही पूरे देश मे भाजपा कार्यकर्ताओं के नाम पर फर्जी आपत्ति करवा कर अधिकतर वोट दलित और मुस्लिम समुदाय के थे ऐसा क्यों किया गया ?
और यदि sir सहीं प्रक्रिया है तो
1)कर्नाटक की महादेवपुरा सीट पर 1 लाख से ज्यादा फर्जी वोट और डुप्लीकेट वोटर क्यों थे ?
2) महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद हुए विधानसभा चुनाव से वाहक 39 लाख नए मतदाता कैसे जुड़े ।
3) हरियाणा में 25 लाख फर्जी वोट कैसे जुड़े ?
4) ब्राजील की मॉडल की फ़ोटो 17 बार और एक बूढ़ी महिला की फ़ोटो 223 बार कैसे उपयोग हुई ?
5) पश्चिम बंगाल में 38 लाख वैध वोटर्स को अवैध घोषित कर दिया गया जबकि उसमें सुनवाई किये लगभग 1 लाख वोट में से 93 प्रतिशत सहीं क्यों पाए गए ?

ऐसे अनगिनत मामलों ने वर्तमान चुनाव आयुक्त  ज्ञानेश कुमार की विश्वस्नीयता गिराई है उसे तत्काल पद से हटा कर चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से लेकर उसकी जांच तक के नए नियम बनाये जाने चाहिए बजाए की ये करने के पूरे देश की भाजपा ज्ञानेश कुमार को बचाने लगी हुई है जिसकी जितनी  निंदा की जाए कम है।