सरकार के खिलाफ लामबंद – 5 नवंबर को 3,500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी करेंगे स्वास्थ्य भवन का घेराव
October 31, 2026
संपादक मनोज गोस्वामी
3–4 वर्षों से इंसेंटिव भुगतान के लिए आंदोलन करने को मजबूर CHOs, राज्य कार्यालय के आदेशों की जिला एवं ब्लॉक स्तर पर लगातार हो रही अनदेखी बनी प्रशासनिक चुनौती
रायपुर 31 अक्टूबर 2026// छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नियमावली एवं निर्देशों के खिलाफ और अपनी मांगों को लेकर पुरे विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मचारी कि लगातार डटे हुए है लेकिन छग शासन के कानों में गूंज नही पहुंच पा रही है या शांत कराने कि कोशिश सतत् जारी है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर प्रदेश के 3,500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आगामी 5 नवंबर 2026 को स्वास्थ्य भवन, नवा रायपुर स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय का घेराव करेंगे। लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं होने, इंसेंटिव घोटाले के नाम पर केवल सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को निशाना बनाकर कथित द्वेषपूर्ण कार्रवाई किए जाने, कार्यों के अत्यधिक बोझ, अस्पष्ट कार्य-दायित्वों तथा विभिन्न जिलों में नौकरी से निकालने की धमकियों के विरोध में यह प्रदेशव्यापी आंदोलन आयोजित किया जा रहा है।
संघ ने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को केवल अपनी प्रोत्साहन राशि का समय पर भुगतान प्राप्त करने के लिए विगत 3–4 वर्षों से लगातार आंदोलन, ज्ञापन एवं विरोध प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस प्रोत्साहन राशि का भुगतान शासन एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक माह समय पर होना चाहिए, उसके लिए कर्मचारियों को बार-बार सड़क पर उतरने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
संघ के अनुसार, राज्य कार्यालय द्वारा प्रत्येक वर्ष एवं समय-समय पर प्रोत्साहन राशि के सत्यापन और भुगतान के लिए स्पष्ट निर्देश एवं आदेश जारी किए जाते हैं। यहां तक कि प्रत्येक माह की 10 तारीख तक PLP पोर्टल के माध्यम से सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद जिला एवं ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार अधिकारी राज्य कार्यालय के आदेशों का गंभीरता से पालन नहीं करते। भुगतान एवं सत्यापन में महीनों की देरी तथा पोर्टल संबंधी अनियमितताएं लगातार बनी हुई हैं। ऐसी स्थिति में राज्य कार्यालय के आदेशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होना प्रदेश की एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती बन चुका है। उच्च कार्यालय के निर्देशों की बार-बार अनदेखी से ऐसा प्रतीत होता है कि जिला एवं ब्लॉक स्तर पर इन आदेशों की कोई जवाबदेही ही निर्धारित नहीं है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि इंसेंटिव घोटाले के नाम पर जारी आदेशों एवं जांच संबंधी कार्रवाई में केवल सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को लक्षित किया जा रहा है, जबकि प्रोत्साहन राशि संस्थागत प्रदर्शन एवं उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर के विभिन्न स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित होती है। ऐसी स्थिति में यदि अनियमितता की जांच की जानी है, तो संबंधित संस्था के समस्त कर्मचारियों की भूमिका, कार्य-विभाजन एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किसी एक संवर्ग को चुनकर कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।
इसके अतिरिक्त उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर स्वीकृत मानव संसाधन की उपलब्धता एवं कार्य-विभाजन की स्थिति की अनदेखी करते हुए संपूर्ण संस्थागत कार्यों, ऑनलाइन प्रविष्टियों एवं विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों का अतिरिक्त भार केवल CHOs पर डाला जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कई जिलों में जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नौकरी से निकालने की धमकियां दिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इससे सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों में असुरक्षा एवं असंतोष का वातावरण निर्मित हो रहा है।

संघ की प्रमुख पांच सूत्रीय मांगें –
- इंसेंटिव घोटाले के नाम पर केवल सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के विरुद्ध जारी द्वेषपूर्ण एवं अनुचित आदेश को तत्काल निरस्त/संशोधित किया जाए तथा विगत 7–8 माह की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- प्रोत्साहन राशि भुगतान में लगातार हो रही अनियमितताओं एवं अव्यवस्थाओं को समाप्त करने के लिए प्रोत्साहन राशि को सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के मूल वेतन में समायोजित किया जाए।
- उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर पदस्थ समस्त मानव संसाधन के अस्पष्ट कार्य-दायित्वों (TOR) का पुनरीक्षण कर प्रत्येक पद के अनुरूप स्पष्ट एवं न्यायसंगत कार्य-विभाजन सुनिश्चित किया जाए।
- सुकमा जिले में PLP पोर्टल पर सत्यापन के उपरांत निर्धारित ग्रेड के विपरीत मनमाने तरीके से प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने के मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा भुगतान की अंतर राशि तत्काल प्रदान की जाए।
- प्रत्येक माह की 10 तारीख तक प्रोत्साहन राशि के सत्यापन एवं भुगतान संबंधी शासन तथा राज्य कार्यालय के निर्देशों का पालन नहीं करने और अनावश्यक विलंब करने वाले जिला एवं ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने कहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्रदेश की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनके आर्थिक हितों, कार्य परिस्थितियों एवं सेवा संबंधी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। यदि राज्य कार्यालय द्वारा जारी आदेशों का पालन जिला एवं ब्लॉक स्तर पर सुनिश्चित नहीं कराया जा सकता, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
संघ ने शासन एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि 5 नवंबर के घेराव से पूर्व सभी मांगों पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेकर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय लिया जाए। संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के 3,500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अपने अधिकारों, सम्मान, आर्थिक सुरक्षा एवं न्यायोचित मांगों के लिए एकजुट होकर स्वास्थ्य भवन का घेराव करेंगे। मांगों का निराकरण नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक एवं चरणबद्ध रूप देने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।




