UPI पर MDR: व्यापारियों पर बोझ अनुचित, शुल्क वापस लिया जाए – चेम्बर अध्यक्ष सतीश थौरानी
September 17, 2026रायपुर। केंद्र सरकार द्वारा 2000 रुपये से अधिक के UPI लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले पर छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने कड़ी आपत्ति जताई है।
चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि डिजिटल लेन-देन पर MDR का वित्तीय भार सीधे व्यापारियों पर डालना अनुचित है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी आधिकारिक बयान के अनुसार उपभोक्ताओं के लिए UPI शून्य शुल्क पर रखा गया है, लेकिन 2000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR और 75 हजार से ऊपर के लेन-देन पर 300 रुपये तक की कैपिंग सीधे व्यापारियों के खाते से काटी जाएगी। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी है।
थौरानी ने कहा, “वर्तमान में खुदरा और थोक व्यापार बेहद सीमित मार्जिन पर चल रहा है। डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने में व्यापारी वर्ग ने अग्रणी भूमिका निभाई है। एक तरफ डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने की बात होती है, वहीं दूसरी ओर इसका संचालन खर्च व्यापारियों पर लाद दिया जाना न्यायसंगत नहीं है।”
चेम्बर ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से दो प्रमुख मांगे रखी हैं:
1. व्यापारियों के लिए भी सभी UPI लेन-देन पर MDR शुल्क पूर्णतः शून्य (0%) रखा जाए।
2. डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का खर्च बैंकों और सरकार द्वारा वहन किया जाए, व्यापारियों पर न थोपा जाए।
श्री थौरानी ने बताया कि इस संबंध में छत्तीसगढ़ चेम्बर जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व और NPCI (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) को विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा।

