भाजपा राज में महासमुंद जिला अस्पताल अव्यवस्थाओं का पर्याय बना – विनोद चंद्राकर

भाजपा राज में महासमुंद जिला अस्पताल अव्यवस्थाओं का पर्याय बना – विनोद चंद्राकर

September 13, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद 13 सितंबर 2026// पूर्व संसदीय सचिव छत्तीसगढ़ शासन एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने साय सरकार पर स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा राज में महासमुंद का सबसे बड़ा और प्रमुख अस्पताल, जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज आज अव्यवस्थाओं का सबसे बड़ा पर्याय बनकर रह गया है। महासमुंद जिला समेत पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह बदहाल कर दिया गया है।

चंद्राकर ने कहा कि महासमुंद में मेडिकल कॉलेज बनने के बाद लोगों में यह उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें घर के पास ही बेहतर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलेगी, बाहर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन भाजपा सरकार की उदासीनता और कमजोर प्रशासनिक कसावट के कारण यह उम्मीद टूट गई है। आज जिला अस्पताल में उपचार केवल जूनियर डॉक्टरों के भरोसे सिमट कर रह गया है। सीनियर और विशेषज्ञ डॉक्टरों का दर्शन दुर्लभ हो गया है। 

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के साथ अस्पताल की जिम्मेदारी भी सीनियर डॉक्टरों को संभालनी होती है, लेकिन वे अस्पताल में मरीजों की जांच और इलाज में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। नियम के अनुसार आपातकालीन सेवाओं के लिए उन्हें जिला मुख्यालय में ही रहकर कार्य देखना है, इसके स्पष्ट निर्देश भी हैं। इसके बावजूद ये वरिष्ठ चिकित्सक रायपुर से अप-डाउन करते हैं। शाम होते ही अस्पताल भगवान भरोसे हो जाता है। इमरजेंसी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति में गंभीर मरीजों को सीधे रायपुर रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब मरीजों को भारी परेशानी और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में महासमुंद में मेडिकल कॉलेज खोलने का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ देना था। उस समय सरकार ने सभी आवश्यक उपकरण, आधुनिक मशीनें, लैब, और पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित कर एक बेहतर व्यवस्था खड़ी की थी। लेकिन भाजपा की साय सरकार ने उस पूरी व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। आज स्थिति यह है कि आवश्यक जांच, सोनोग्राफी, एक्सरे जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी विशेषज्ञों की भारी कमी है। मरीजों को निजी सेंटरों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी, वरिष्ठ डॉक्टर और स्टाफ पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी के चलते मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा। सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देकर व्यवस्था सुधारनी चाहिए।