OBC के लिए अलग स्पष्ट कॉलम नहीं, केंद्र की नीयत पर गंभीर सवाल – विनोद चंद्राकर

OBC के लिए अलग स्पष्ट कॉलम नहीं, केंद्र की नीयत पर गंभीर सवाल – विनोद चंद्राकर

September 3, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद 03 सितंबर 2026// केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जनगणना-2027 में जाति की गणना शामिल करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था में OBC के लिए अलग और स्पष्ट वर्गीकरण नहीं होने पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मुद्दे पर पूर्व संसदीय सचिव छत्तीसगढ़ शासन एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल जाति पूछ लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि OBC समाज की स्पष्ट और विश्वसनीय गणना भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

चंद्राकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना में जातिगत आंकड़े जुटाने का निर्णय लिया है, जो लंबे समय से उठ रही सामाजिक न्याय की मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन यदि जाति की जानकारी खुले रूप में दर्ज की जाएगी और OBC के लिए स्पष्ट पृथक वर्गीकरण नहीं होगा, तो OBC समाज की वास्तविक जनसंख्या के आंकड़ों को व्यवस्थित और विश्वसनीय रूप से सामने लाने में गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अलग-अलग जातियों, उपजातियों और स्थानीय नामों के कारण जातिगत आंकड़ों का वैज्ञानिक वर्गीकरण बेहद महत्वपूर्ण है। जब सरकार खुद जातिगत आंकड़े जुटाने जा रही है, तो OBC की स्पष्ट पहचान और वर्गीकरण की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है? केंद्र सरकार को इस सवाल का जवाब देश के पिछड़े वर्गों को देना चाहिए।

चंद्राकर ने कहा कि OBC समाज को केवल चुनाव के समय याद करना और उसके अधिकारों के सवाल पर मौन रहना स्वीकार नहीं किया जा सकता। सामाजिक न्याय की नीतियों, आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में प्रभावी भागीदारी के लिए यह जानना जरूरी है कि देश में विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक जनसंख्या कितनी है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से सामाजिक न्याय और जातिगत जनगणना की मांग उठाती रही है। राहुल गांधी ने भी जातिगत जनगणना और “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का सवाल राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रखा है। ऐसे में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि जातिगत गणना को पूरी पारदर्शिता और वैज्ञानिक तरीके से कराया जाए।

पूर्व विधायक ने कहा कि OBC समाज देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उसके आंकड़े स्पष्ट रूप से सामने आए बिना सामाजिक न्याय की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना कठिन होगा।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जनगणना-2027 में OBC की स्पष्ट, पृथक और वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रावधान किए जाएं, ताकि देश के पिछड़े वर्गों की वास्तविक जनसंख्या सामने आए और उन्हें उनकी आबादी के अनुरूप अधिकार, प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।

चंद्राकर ने कहा कि OBC समाज अब केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि अपने अधिकार, सम्मान और हिस्सेदारी का हिसाब चाहता है। केंद्र सरकार को इस मांग से बचने के बजाय स्पष्ट जवाब देना चाहिए।