गांव से पत्रकारिता तक मोनेन्द्र व्यवहार की संघर्षपूर्ण प्रेरणादायक यात्रा

गांव से पत्रकारिता तक मोनेन्द्र व्यवहार की संघर्षपूर्ण प्रेरणादायक यात्रा

August 24, 2026 0 By Central News Service

महासमुंद/बागबाहरा 24 अगस्त 2026// छोटे से ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले मोनेन्द्र व्यवहार की जीवन यात्रा संघर्ष, मेहनत और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणादायक कहानी है। महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम हाथीगढ़ में जन्मे मोनेन्द्र व्यवहार ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी शिक्षा पूरी की और वर्तमान में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

मोनेन्द्र व्यवहार, श्री आनन्द राम व्यवहार एवं श्रीमती संतोषी व्यवहार के पुत्र हैं। उनके पिता शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और लेक्चरर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी होने के साथ-साथ खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी संभालती हैं। माता-पिता से मिले मेहनत, ईमानदारी और लक्ष्य के प्रति समर्पण के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत आधार दिया।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम हाथीगढ़ में कक्षा पहली से पांचवीं तक हुई। इसके बाद उन्होंने मिडिल स्कूल सुखरीडबरी से कक्षा छठवीं से आठवीं तथा हाई स्कूल सुखरीडबरी से कक्षा नौवीं और दसवीं की पढ़ाई पूरी की। कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं की शिक्षा उन्होंने पब्लिक स्कूल बागबाहरा से प्राप्त की।

उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने बागबाहरा कॉलेज में प्रवेश लिया और बी.ए. की पढ़ाई पूरी की। अंग्रेजी साहित्य में उनकी विशेष रुचि रही। इसके बाद उन्होंने पिथौरा से एम.ए. की शिक्षा पूरी की।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा के अलग-अलग पड़ाव पार करना उनके लिए आसान नहीं था। जीवन में आई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। उनका मानना है कि हर संघर्ष इंसान को कुछ नया सिखाता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

वर्तमान में मोनेन्द्र व्यवहार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वे पत्रकारिता को केवल रोजगार या पेशा नहीं, बल्कि समाज और आम लोगों की आवाज को सामने लाने का माध्यम मानते हैं। गांव, कस्बे और समाज से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाना तथा जनहित के मुद्दों को लोगों तक पहुंचाना उनके पत्रकारिता जीवन का प्रमुख उद्देश्य है।

मोनेन्द्र व्यवहार का कहना है कि “संघर्ष इंसान को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाता है।” उनका प्रयास है कि अपनी लेखनी और पत्रकारिता के माध्यम से समाज के लिए सकारात्मक योगदान दें तथा अपने माता-पिता, गांव और क्षेत्र का नाम गौरवान्वित करें।

छोटे से गांव हाथीगढ़ से शुरू हुई मोनेन्द्र व्यवहार की यह यात्रा आज भी जारी है। उनके सामने भविष्य के कई लक्ष्य हैं और उन्हें हासिल करने के लिए वे निरंतर प्रयासरत हैं। उनकी जीवन कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, संघर्ष और निरंतर प्रयास के बल पर ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।