PMO को शिकायत: CGMSC में नया टेंडर और पुराना कॉन्ट्रैक्ट एक साथ, किसे फायदा?*

PMO को शिकायत: CGMSC में नया टेंडर और पुराना कॉन्ट्रैक्ट एक साथ, किसे फायदा?*

August 12, 2026 0 By Central News Service

रायपुर
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी CGMSC में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी अब सिर्फ देरी का मामला नहीं रही। नया टेंडर प्रक्रिया में आगे बढ़ चुका है, लेकिन इसी बीच 2022 के पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को फिर बढ़ाने की कवायद ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस शिकायत को लेकर 3 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को पत्र भेजे गए हैं। शिकायत में टेंडर प्रक्रिया में देरी, पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट के बार-बार विस्तार और समग्र खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

नया टेंडर आगे, पुराना कॉन्ट्रैक्ट भी साथ-साथ
CGMSC ने आयुर्वेदिक दवाओं के लिए 22 जून 2026 को Tender No. 10, 11, 12 और 13/AYUR-Classical जारी किए थे। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई 2026 थी। इसके बाद कवर-A खोला जा चुका है और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

इसके बावजूद 7 अगस्त 2026 को CGMSC की ओर से एक पत्र जारी हुआ जिसमें पुराने दर अनुबंध को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित फर्मों से सहमति मांगी गई। यही पत्र अब विवाद की जड़ बन गया है।

सवाल सीधा है: जब नई निविदा अंतिम चरण में है तो 2022 के रेट कॉन्ट्रैक्ट को विस्तार देने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या तत्काल आपूर्ति की मजबूरी है या फिर प्रतिस्पर्धा को दरकिनार करने की कोशिश?

17 महीने तक अटकी रही फाइल
शिकायतकर्ताओं के अनुसार इससे पहले 20 नवंबर 2025 को Tender No. 7, 8 और 11/AYUR-Classical वेबसाइट पर अपलोड हुए थे। आरोप है कि प्रक्रिया में असामान्य देरी हुई और इसी बीच पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को 6 महीने के लिए और फिर आगे बढ़ाया गया।

करीब 17 महीने बाद 22 जून 2026 को पुराने टेंडर को निरस्त कर नया टेंडर निकाला गया। इतने लंबे समय तक प्रक्रिया क्यों रुकी रही, इसे लेकर भी जांच की मांग उठी है।

“जीवनरक्षक नहीं, फिर इतनी जल्दबाजी क्यों?”
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आयुर्वेदिक दवाएं जीवनरक्षक श्रेणी में नहीं आतीं। ऐसे में पुराने अनुबंध को बढ़ाने की जल्दबाजी क्यों? कहीं किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए तो यह कदम नहीं उठाया जा रहा?

अधिकारी क्या बोले
इस मामले पर CGMSC के MD रितेश कुमार अग्रवाल से कार्यालय में मिलने की कोशिश की गई। एक घंटे से अधिक इंतजार के बाद बताया गया कि वे मंत्रालय में बैठक के लिए चले गए हैं।

CGMSC के चेयरमैन दीपक म्हस्के ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। “टेंडर प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है, लेकिन खबर में उठाए गए बिंदुओं को हम गंभीरता से लेंगे और विभाग से जानकारी लेंगे।”

अब क्या
फिलहाल गेंद CGMSC के पाले में है। नया टेंडर अगर प्रतिस्पर्धी दर पर खरीद का रास्ता खोलता है तो पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को बार-बार बढ़ाने का औचित्य क्या है? और अगर विस्तार जरूरी है तो उसकी प्रशासनिक वजह सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

टेंडर की फाइलें, तारीखें और 7 अगस्त का पत्र अब कई सवालों के गवाह हैं। जांच के बाद ही साफ होगा कि यह महज प्रशासनिक देरी थी या पुराने अनुबंध को बचाए रखने की कोई कवायद।