बस्तर में विकास नहीं विनाश की बन रही रणनीति, विरोध को दबाने नहीं हटाया जा रहा बल….
April 5, 2026संपादक मनोज गोस्वामी
अबूझमाड़ के जल-जंगल जमीन पर सरकार की कुदृष्टि
नक्सल मुक्त होने के बाद भी बस्तर में 60 हजार सुरक्षा बलों की तैनाती क्यों?
महासमुंद 05 अप्रैल 2026/ पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा की साय सरकार के उस दावे पर सवाल उठाए हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ को 100 फीसदी नक्सल मुक्त होने की बात कही है। श्री चंद्राकर ने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ पूरी तरह से लाल आतंक मुक्त हो चुका है तो अतिरिक्त 60 हजार सुरक्षा बलों की तैनाती अभी भी बस्तर क्षेत्र में क्यों है। इन 60 हजार सुरक्षा बलों में 40 हजार केंद्रीय रिजर्व फोर्स है। जिन्हें अब वापस भेज देना चाहिए।
लेकिन, सरकार एक साल तक और फोर्स की तैनाती बस्तर में करने की बात कह रही है। इसका अर्थ है कि या तो अभी भी छत्तीसगढ़ पूरी तरह नक्सल मुक्त नहीं हुआ है, या फिर हसदेव की तरह अबूझमाड़ के जल, जंगल जमीन को भी अडाणी को साैंपने की योजना भाजपा द्वारा बनाई जा रही है। ताकि, विरोध होने पर आसानी से फोर्स की मदद से उन्हें नियंत्रित की जा सके।

चंद्राकर जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में लाल आतंक की समाप्ति से अबूझमाड़ के विकास में तेजी आएगी। छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त होकर शांति का टापू बने यह सभी चाहते हैं। लेकिन, विकास के नाम पर विनाश की जो रणनीति भाजपा बना रही है, वह प्रदेश के वनवासियों के साथ छल है। क्योंकि, 60 हजार बल की तैनाती अभी भी बस्तर में है। सरकार का तर्क है कि स्थिति सामान्य होने तक तथा विकास कार्यों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बल की नियुक्ति की गई है। अब सवाल यह उठता है कि गृहमंत्री अमित शाह के डेडलाइन अनुसार जब 31 मार्च 2026 तक प्रदेश पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है, ऐसे में बस्तर के विकास में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होना चाहिए। क्योंकि, वनांचल क्षेत्र के भोलेभाले आदिवासी भला विकास कार्यों में क्या अवरोध उत्पन्न करेंगे। विरोध तब होगा जब आदिवासियों से उनका जल, जंगल, जमीन छीना जाएगा। क्योंकि, पहले ही भाजपा की साय सरकार ने अडानी के लिए हसदेव अरण्य के लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हरे-भरे जंगल को काटकर आदिवासियों की मूल भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि हसदेव अरण्य देवभूमि से जहां आदिवासियों की संस्कृति, सभ्यता जुड़ी है। यही नहीं, जिस दंडकारण्य में प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल के सबसे अधिक समय बीताए थे, उसे भी भाजपा की सरकार ने अडानी प्रेम का भेंट चढ़ा दिया। अब अबूझमाड़ के शेष वनांचल क्षेत्र को पुन: अडाणी के नाम पर बलि देने की योजना भाजपा बना रही है। जिसके चलते स्थानीय निवासियों, आदिवासियों के विरोध को दबाने सेना की तैनाती कर दी गई है। भाजपा सरकार की कार्यशैली से तो यही लग रहा है कि, नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने का उद्देश्य प्रदेश का विकास नहीं, अपितु, छत्तीसगढ़ के जल-जंगल-जमीन व बेश कीमती खनीज संपदा का दोहन करना है।



