31 मार्च नक्सलवाद का अंत: भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय, छत्तीसगढ़ में एक नए युग का सूर्योदय
March 31, 2026हमारे वीर जवानों का त्याग, तपस्या, बलिदान जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस धरती को सुरक्षित किया ऐसे सभी शहीदों को नमन।
रायपुर, छत्तीसगढ़, दिनांक 30 मार्च 2026। छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल, पिछले लगभग चार दशकों से नक्सलवाद की भयावह छाया में जीता रहा है। यह वह धरती है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और आदिवासी अस्मिता के लिए जानी जाती है, लेकिन नक्सलवाद ने इसे “लाल आतंक” की पहचान दे दी। निर्दोष ग्रामीणों की हत्याएं, जवानों पर घातक हमले, विकास कार्यों में बाधा और भय का माहौल—इन सबने छत्तीसगढ़ को गहरे घाव दिए हैं।
देश में नक्सलवाद की शुरुआत भले ही अन्य क्षेत्रों से हुई हो, लेकिन इसका सबसे व्यापक और हिंसक प्रभाव छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर में देखने को मिला। अनेक बड़े हमलों में सैकड़ों बहादुर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी, वहीं हजारों निर्दोष नागरिक भी इस हिंसा के शिकार बने। यह केवल सुरक्षा की चुनौती नहीं थी, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और मानवीय संकट भी था। आज जब 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक ऐतिहासिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है, तो यह केवल एक तारीख नहीं बल्कि एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। यह संकल्प देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दृढ़ इच्छाशक्ति वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लिया गया है। उनकी स्पष्ट नीति, कठोर निर्णय क्षमता और “जीरो टॉलरेंस” की रणनीति ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को नई दिशा दी है। राज्य स्तर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा का विशेष योगदान भी सराहनीय है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय, संयुक्त ऑपरेशन और सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई ने नक्सलियों की जड़ों को कमजोर कर दिया है।
नक्सलवाद ने छत्तीसगढ़ को जो नुकसान पहुंचाया, वह केवल आंकड़ों में नहीं मापा जा सकता:
हजारों परिवार उजड़ गए,
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी
सुविधाएं बाधित रहीं,
उद्योग और निवेश ठप रहे,
आदिवासी क्षेत्रों का समुचित विकास रुक गया भय और असुरक्षा का माहौल पीढ़ियों तक बना रहा
लेकिन अब जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं, तो छत्तीसगढ़ के लिए संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं।
नक्सलवाद के अंत के बाद छत्तीसगढ़ को मिलने वाले प्रमुख लाभ:
बस्तर में शांति और स्थिरता स्थापित होगी।
सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।
पर्यटन को नया आयाम मिलेगा—बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता विश्व पटल पर उभरेगी।
निवेश और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
आदिवासी समाज को मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान मिलेगा।
बस्तर, जिसे कभी “छत्तीसगढ़ का कश्मीर” कहा जाता है, अब वास्तव में शांति का टापू बन सकता है। यहां की वादियां, झरने, जंगल और सांस्कृतिक धरोहर देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करेंगी। विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इस परिवर्तन के पीछे हमारे वीर जवानों का त्याग, तपस्या और बलिदान है। जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस धरती को सुरक्षित करने का कार्य किया। ऐसे सभी शहीदों को मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं।
अंततः, यदि 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद का पूर्ण खात्मा होता है, तो यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय होगा। इसमें अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व को विशेष रूप से याद किया जाएगा, जिनकी रणनीति और संकल्प ने इस जटिल समस्या के समाधान की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाई है।छत्तीसगढ़ अब भय से नहीं, बल्कि विकास, शांति और समृद्धि से पहचाना जाएगा—यही एक नए युग का वास्तविक सूर्योदय है।


