संतों का मजाक बनाने वाले बाबा स्वामी अभिरामदास के खिलाफ संत समाज ने बोला हल्ला
December 31, 2025
Chhattisgarh News: संत समाज रायपुर महानगर ने सनातन धर्म के नाम पर ढोंग फैला रहे कुशालपुर रायपुर निवासी अमनदत्त ठाकुर उर्फ स्वामी अभिरामदास के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संत समाज ने आज मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि निष्काशन की मांग को लेकर वृंदावन स्थित मलूकपीठ के पीठाधीश्वर से भेंट कर उसकी ओर से किये जा रहे धर्म विरोधी और अंधविश्वास फैलाने वाली हरकतों की जानकारी दी गई है।

समाज ने प्रशासन से मांग है कि उसके ट्रस्ट को बंद करते हुए इसके यूट्यूब चैनल ‘आध्यात्मिक विरासत’ चैनल को ब्लाक कर दोषी ट्रस्ट के सदस्यों के विरूद्ध उचित कार्यवाही की जाये। समाज के प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि यह व्यक्ति संत का वेष धारण करके मार्च 2024 में इसने वृंदावन स्थित मलूकपीठ से गुरूदीक्षा ली, जबकि की ओर से पूर्व के पांच वर्षों से घूम घूम कर प्रदेश की भोली भाली जनता को गुरू दीक्षा देकर झूठा प्रचार प्रसार कर रहा था। सितम्बर 2024 में वृंदावन स्थित श्री मलूकपीठ से विरक्त दीक्षा ली गई, जिसमें संन्यास ग्रहण कर घर परिवार का त्याग करना होता है। इसके बाद जनवरी 2025 महाकुंभ प्रयागराज में इसे श्री मलूकपीठ द्वारा जगतगुरू एवं मठाधीश की उपाधि प्रदान कर दी गई। फर्जी गौशाला और महाकुभ में अर्जित लाखों रूपये की चंदा उगाही की गई। उपरोक्त जानकारी समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों, सूचना का अधिकार एवं पुलिस विभाग धमतरी के माध्यम से उजागर हुई।

पीठाधीश्वर से निष्कासन की मांग
आरोप है कि अमनदत्त ठाकुर ने अपने रायपुर निवास को छोड़कार वृंदावन ओरछा की ओर भाग गया। इन सभी बातों को लेकर संत समाज रायपुर ने वृंदावन स्थित मलूकपीठ के पीठाधीश्वर से भेंट कर अपना विरोध दर्ज कराया एवं शिकायत के साथ पीठाधीश्वर से इसके निष्कासन की मांग की गई। साथ ही साथ संतों द्वारा चेतावनी दी गई कि ऐसे छद्म्वेषधारी द्वारा साधु संत का चोला ओढ़ कर आम जनता को गुमराह तथा लूट रहें है यदि पीठ द्वारा इनके निष्काशन नहीं किया जायेगा तो संत समाज द्वारा संम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन करते हुये आम जनता को जागृत किया जायेगा कि श्री मलूकपीठ ने ऐसे फर्जी संत को पीठाधीश एवं जगतगुरू की उपाधि प्रदान कर जनता को लूटने की खुली छूट प्रदान की गई है।

इस संबंध में छत्तीसगढ़ संत समुदाय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलकर उत्तराखंड सरकार दचलाये गये आपरेशन कालनेमी की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी फर्जी साधु संतों की धरपकड़ करने की मांग की गई थी, जिस पर मुख्यमंत्री ने कार्यवाही का आश्वासन दिया था।

छत्तीसगढ़ संत समाज ने लगाए ये आरोप
अपनी आध्यत्मिक शक्तियों के द्वारा गर्भ पूर्व लिंग परीक्षण की बात करना और अपनी तथाकथित शक्ति के माध्यम से लड़का है कि लड़की यह बताना।

समाज के प्रतिष्ठित जनों को तांत्रिक तथा घर परिवार की महिलाओं को टोनडी बताना और परिवार या समाज में उनके विरुद्ध भय का माहौल बनाना।
फर्जी गौशाला का संचालन कर प्रचार पसार करना तथा अपने खातों में ऑनलाइन पैसे मंगाना और अपने चेलों के खातों में उनको हस्तांतरित करना। गौशाला के लिए आए दान के पैसों से कार खरीदकर लोगों को दान से प्राप्त बताया जाता है।
इनके एक पूर्व शिष्या का कहना है कि इनके द्वारा किये गये व्यवहार से मैं डिप्रेशन में चली गई थी, जिससे आत्महत्या जैसे कार्य का प्रयास भी किया है।
भागवत कथा में पंडित धीरेन्द्र शास्त्री जी (बागेश्वर महराज) और प्रदीप मिश्रा के बारे में अनर्गल टिप्पणी करना
ट्रस्ट बनाकर ट्रस्ट के आड़ में मनी लॉड्रिंग तथा कलेक्टर महोदय के पास फर्जी दस्तावेज जमाकर डाक्यूमेंट्री फ्रॉड
पुलिस जांच में न गौशाला पायी गई और न ही ट्रस्ट पाया गया, सिर्फ कागजों में चंदा उगाही का कार्य जोरों से लगातार भागवत के आड़ में किया जा रहा है।
कुम्भ के आड़ में 75 लाख रूपये से अधिक की ठगी
महिला ने बाबा के खिलाफ लगाये हैं कई गंभीर आरोप
इससे पूर्व में राजधानी रायपुर के बोरियाखुर्द नवरंग चौक निवासी प्रमिला बाबुरिक (लोधी क्षत्री) ने इस बाबा के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाये हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उसके आरोपों पर जांच के बाद उसे न्याय नहीं मिला तो वे परिवार के साथ उक्त बाबा के घर के सामने आत्मदाह करेगी। इस संबंध में रायपुर एसएसपी से शिकायत भी की थी।
‘बेटे को सन्यास के लिए उकसाया’
महिला ने आरोप लगाए हैं कि संत अमनदत्त ठाकुर उर्फ अभिरामदास ने उनके छोटे पुत्र प्रशांत कुमार बाबुरिक को धर्म के नाम पर बरगला कर उसे सन्यास के लिए उकसाया। बाबा भोले-भाले लोगों को अपनी जाल में फंसाकर वृंदावन के आश्रम में ले जाता है, जहां उन्हें नौकरों की तरह काम करने के लिए मजबूर करता है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार निम्न वर्ग से है और उन्होंने अपनी हैसियत से अधिक खर्च कर प्रशांत की शिक्षा पूरी कराई थी, ताकि वह परिवार का सहारा बने।, लेकिन संत अमनदत्त ठाकुर ने उनके बेटे को भागवत कथा जैसे आयोजनों में शामिल होने के बाद सन्यास के लिए प्रेरित किया। बाबा ने प्रशांत को नया नाम ‘शेष नारायण वैष्णव’ देने और परिवार का त्याग कर उनके साथ वृंदावन जाने के लिए कहा। परिवार के विरोध करने पर बाबा ने धमकी दी कि अगर प्रशांत को सन्यास लेने से रोका गया, तो वह पागल हो जाएगा या किसी दुर्घटना का शिकार हो सकता है।
‘तंत्र-मंत्र से डराता है बाबा’
महिला ने आरोप लगाए है कि यह ढोंगी बाबा तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को डराता-धमकाता है और उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर सन्यास के लिए दबाव बनाता है। वो वह तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को डराता है और मानसिक रूप से कमजोर कर देता है। इसी तरह वह भोले-भाले युवाओं को सन्यास लेने के लिए मजबूर करता है और वृंदावन के आश्रम में उन्हें नौकरों की तरह काम करने को मजबूर करता है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं इस मामले से लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।


