अपनी सीमा में रहना ही प्रतिक्रमण : मनीष सागर, 84 लाख योनियों के जीवों से की गई जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए सामूहिक क्षमायाचना
August 27, 2025रायपुर। टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में बुधवार को परम पूज्य उपाध्याय भगवंत युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज की पावन निश्रा में संवत्सरी पर्व क्षमापना मनाया गया। संपूर्ण ब्रह्मांड के 84 लाख योनि के जीवों से जाने व अनजाने में हुई सभी भूलों के लिए क्षमायाचना की गई। इससे पहले उपाध्याय भगवंत ने धर्मसभा में सीख दी कि अपनी सीमा में रहना ही प्रतिक्रमण है। अपने भीतर के दोषों निकालना ही प्रतिक्रमण है। प्रतिक्रमण को भार नहीं आभार माने।
पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन उपाध्याय भगवंत ने प्रतिक्रमण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रतिक्रमण तो हम हर साल करते हैं। श्रद्धा के साथ ज्ञान का भी होना जरूरी है। हमारे भीतर श्रद्धा तो बहुत है तभी हम हर साल प्रतिक्रमण करते हैं। हमारे भीतर ज्ञान नहीं होता कि कैसे करना है। जैसे व्यक्ति पूरा है और आंख नहीं होगी तो वह ठोकरे ही खायेगा। वैसे ही ज्ञान के बिना श्रद्धा अंधविश्वास हो जाती है। हमें श्रद्धा रखकर तो प्रतिक्रमण करना ही है। ज्ञानपूर्वक प्रतिक्रमण करेंगे तो बहुत लाभ होगा।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि प्रतिक्रमण अर्थ ही है अपनी सीमा में आ जाना। हम सभी ने स्वेच्छा से साल भर तो अपनी सीमाओं को क्रॉस किया है। हम मन,वचन और काया से अपनी सीमा को क्रॉस करते हैं। मन का अतिक्रमण तो साल भर चलता है। जब हम इस पर विचार करते हैं तो हम खुद से आंख नहीं मिला पाते। मन के भीतर निरंतर भावों की धारा बहती रहती है
अधिकांश बार हम अपनी सीमाओं का उल्लंघन करते हैं। कई बार सामाजिक भय से हम मन,वचन और काया के दोष से बच जाते हैं। लगातार कर्मबंधन करते हैं। कर्मबंधन का संबंध ही मन से है।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि ज्ञानियों ने रोज प्रतिक्रमण करने कहा है। रोज अपने दोषों को देखो और दोषों को निकालो। जिसका खुद पर आत्म नियंत्रण आ गया, वह पाप कम कर लेगा। ज्ञानियों ने इसके लिए आत्म अवलोकन, आत्म विश्लेषण करने की सीख दी है। चिंतन और मनन करने कहा है। आज आप सब त्याग कर यहां प्रतिक्रमण कर रहे हो तो लक्ष्य हासिल करना ही उद्देश्य होना चाहिए। परमात्मा ने हमें जीवन सुधारने की एक व्यवस्था दी है। इसे श्रद्धापूर्वक,ज्ञानपूर्वक अपनाना है।
क्षमापर्व पर हुए विभिन्न धार्मिक आयोजन
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्यामसुंदर बैदमुथा ने बताया कि उपाध्याय भगवंत की पावन निश्रा में क्षमापर्व पर आज विविध धार्मिक आयोजन हुए।
प्रातःकाल साढ़े 5 बजे पौषध प्रतिक्रमण से दिन की शुरुआत हुई। इसके बाद लाभार्थी परिवार ने सुबह 7 बजे उपाध्याय भगवंत को बारसा सूत्र बोहराया। पांच ज्ञान की पूजा के लाभार्थी परिवारों ने पूजा की। इसके पश्चात बारसा सूत्र का वाचन प्रारम्भ हुआ। दोपहर 2:30 बजे संवत्सरी प्रतिक्रमण का शुभारंभ श्रावकों के लिए पटवा भवन और श्राविकाओं के लिए विवेकानंद नगर के ज्ञान वल्लभ उपाश्रय में हुआ। श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल रहा। सभी समाजजनों ने धर्म लाभ लिया।


