ऐसी बात भी नहीं बोलना जिसमें हिंसा छुपी हो: मनीष सागरजी,जीवन में हो सदैव परमात्मा का आलंबन और अहिंसा का पालन
August 20, 2025
रायपुर। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के प्रथम दिन बुधवार को टैगोर नगर पटवा भवन की धर्मसभा में
परम पूज्य उपाध्याय भगवंत युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने अहिंसा का पालन करने की सीख दी।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि पहला कर्तव्य है दूसरे जीवों के साथ अहिंसा के साथ जिओ, दूसरा कर्तव्य है देव,गुरु एवं धर्म के साथ आलंबन लेकर जिओ। ऐसा हमारा जीवन होना चाहिए। पहला कर्तव्य सभी जीवों के साथ अहिंसा का पालन करें। दूसरा कर्तव्य परमात्मा के साथ आलंबन रखें।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि जब हृदय संवेदनशील होता है तो मानवता आती है। संवेदना के बल पर ही मानव प्रभु के लायक पात्र बन पाता है। प्रभु की उसी को मिलते हैं जिसका हृदय संवेदनशील होता है। जिसके हृदय में करुणा व दया होती है। दूसरे के दुख को समझ सके। दूसरे की भावनाओं को समझ सके। ऐसी जिसकी क्षमता हो वही व्यक्ति वास्तव में प्रभु के लायक बन पाता है।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि पहले परमात्मा से और दूसरा सदगुरु और धर्म का आलंबन होना चाहिए। परमात्मा थे तभी गुरु उनके मार्ग का अनुसरण किए। तभी जिनवाणी मिली। इस धर्म का उद्गम हुआ। परमात्मा का हमारे जीवन में मुख्य योगदान है।
परमात्मा के प्रति हमारा सिर्फ आठ दिन पर्युषण का कर्तव्य नहीं है। रोज का कर्तव्य है कि हम परमात्मा की पूजा करें। परमात्मा की भक्ति करें। माला, पूजा,पाठ,जप के केंद्र में परमात्मा है। जब तक हमारे जीवन के केंद्र में परमात्मा है तब तक हमारा जीवन सुरक्षित है। जिस दिन हमारे केंद्र से परमात्मा हट गए, उस दिन हम मुर्दे के जैसे जाएंगे।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि परमात्मा कोई ऑप्शन नहीं है। कभी मंदिर गए, कभी नहीं गए। परमात्मा को दुख में सुमिरन किए, सुख में नहीं किए। ऐसा।नहीं होना चाहिए। परमात्मा का सुमिरन हर परिस्थिति में करना चाहिए। जो देव,गुरु धर्म की अवहेलना करता है। मंदिर नहीं जाता है। वह परमात्मा का रागी नहीं है। परमात्मा भी उसको अगले जन्म में नहीं मिल पाते हैं।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि जीवन में मित्र का चयन भी अच्छा होना चाहिए। गलती से भी गलत दोस्त नहीं बनना चाहिए। एक छेद भी नाव को डूबा सकता है। वैसे ही गलत संगत हमारे पतन का कारण बनती है। जैसी संगत वैसी रंगत होती है। दोस्त अच्छा बनाएं यह हमेशा ध्यान रखिए। जो व्यक्ति धर्म में रुचि रखता हो ऐसा व्यक्ति को दोस्त बनाएं। धार्मिक व्यक्ति से दोस्ती होगी तो जीवन संवर जाएगा। दोस्त ऐसा बनाइए,जो बाहर से भी धार्मिक हो। भीतर से गुणों से भी धार्मिक होना चाहिए।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि जब जब भी हम जीवन जीते हैं। हमारे आसपास बड़े छोटे सभी प्रकार के जीव होते हैं। सभी के प्रति अभयदन का भाव होना चाहिए। अभयदान वही दे सकता है जो सामने वाले के भीतर भाव में क्या चल रहा है उसकी संवेदना कर सके। इतना कोमल अपने हृदय को बनाएं, इससे हमें समझ आ जाए कि सामने वाले के भीतर क्या घटित हो रहा है। जब व्यक्ति असंवेदनशील हो जाता है तो ना कोमलता रहती है। ना सरलता रहती है। ना क्षमा होती है। ना अहिंसा पलती है। ना यतना होती है। ये सब धर्म के प्राण चले जाते हैं।
21 दिवसीय दादा गुरु इकतीसा 31 अगस्त से
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्यामसुंदर बैदमुथा ने बताया कि 21 दिवसीय दादा गुरु इकतीसा 31 अगस्त से प्रारंभ होगा। कल धर्मसभा में मूर्ति विराजन,अखंड दीपक, कलश व तोरण का लाभ लिया जा सकता है। ज्ञानवल्लभ उपाश्रय विवेकानंद नगर में यह आयोजन होगा। आज धर्मसभा में परम पूज्य उपाध्याय भगवंत को कल्पसूत्र बोहरने का लाभ सुंदरबाई,अनोपचंद पारख परिवार को मिला। प्रथम ज्ञान पूजा का लाभ साधर्मिक परिवार को मिला। द्वितीय ज्ञान पूजा का लाभ भंवरी बाई,नेमीचंद, श्याम सुंदर, किशनचंद नरेश कुमार बेदमुथा परिवार को मिला। तृतीय ज्ञान पूजा का लाभ हेमीबाई,पुखराज,जसराज, अंकित कुमार योगलूनिया परिवार को मिला। चतुर्थ ज्ञान पूजा का लाभ पुष्पा देवी,संपत लाल पारख परिवार को मिला। पंचम ज्ञान पूजा का लाभ मदनाबाई, जसराज,तिलोकचंद, शांतिलाल,अशोक कुमार बरडिया परिवार को मिला।


