परिवार में आचार संहिता से ही शांति, संस्कार और प्रगति संभव : मनीष सागरजी महाराज,जीवन में सेवा के मौके से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए
August 10, 2025रायपुर। तीन चीजों को हासिल करने पर हमारा पारिवारिक जीवन सफल हो जाएगा। पहला परिवार में ऐसा वातावरण बनाएं कि सुबह से लेकर शाम तक अशांति ना हो। दूसरा हम संस्कारों के लिए जागृत हो जाएं। संस्कारों को विशेष महत्व दें। तीसरा प्रगति करें। एक दूसरे की मदद करने से पीछे नहीं हटे। चाहे वह अर्थ के क्षेत्र में हो या धर्म के क्षेत्र में। हमेशा एक दूसरे को सहयोग कर आगे बढ़ाएं। शांति, संस्कार और प्रगति इन तीन धुरियों पर ही हमारे परिवार की व्यवस्था टिकी हुई है। हम कोशिश करें कि परिवार व्यवस्था में हम अच्छे सदस्य की भूमिका निभाएं। ये संदेश टेगौर नगर पटवा भवन में रविवार को विशेष प्रवचनमाला में उपाध्याय भगवंत युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने दिया।
धर्मसभा में परम पूज्य उपाध्याय भगवंत युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने कहा कि मन शांत हो, अच्छे संस्कार हो तो प्रगति का कारण बनता है। परिवार में जीना है तो एक छोटा सा फार्मूला फॉलो करना चाहिए। हमेशा सेवा के मौके से कभी कतरना नहीं चाहिए। सेवा के मौके में कभी कंजूसी नहीं करनी चाहिए। सेवा एक ऐसा कार्य है, जो कभी असफल नहीं होता। यह अमोघ अस्त्र है किसी को भी अपना बनाने और प्रेम पाने के लिए। सेवा के माध्यम से पत्थर दिल को भी पिघलाया जा सकता है। परिवार में आपसी मनमुटाव, छोटी-छोटी चीजों के लिए सेवा करने से कभी पीछे नहीं हटे। सामने वाला क्या कर रहा है यह ना सोचकर, हम क्या अच्छा कर सकते हैं, यह करने की कोशिश करें। इसकी जरूरत परिवार में और समाज में अधिक है।
परिवार और समाज में टीम भावना रहे
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि परिवार और समाज में टीम भावना रहेगी तो हमेशा एकता और प्रेम रहेगा। कोशिश करें अपनी भूल को स्वीकारना सीखे। बलिदान देकर दूसरे की भूल को भी स्वीकारना पड़ा तो जरूर स्वीकार करें। जीवन ऐसा जीना चाहिए जिसमें किसी से शत्रुता ना हो। परिवार में रहने का लक्ष्य हमें मालूम होना चाहिए। परिवार में रहना हमारे लिए आभार हो, भार नहीं हो। परिवार में रहना हमारी निश्चिंतता हो हमारी चिंता का विषय ना हो। परिवार में रहना हमारी कर्म निर्झरा का कारण बने।परिवार में रहना हमारे कर्म बंधन का कारण ना बने। परिवार में रहना हमारी साधना बने। परिवार में रहना हमारी विरादना बने। जब तक हम हमारे मकसद को याद नहीं करेंगे परिवार में सही रूप से व्यवस्थित रूप से जीवन शैली को बना नहीं पाएंगे।
शांति, संस्कार और प्रगति परिवार के तीन लक्ष्य
उपाध्याय भगवंत ने परिवार के तीन मकसद बताएं। उन्होंने पहला मकसद बताया शांति। वर्तमान जीवन हमारा शांतिमय हो। चिंताएं हट जाए और शांति बहाल हो जाए। परिवार में सदैव शांति का माहौल बना रहे। उन्होंने दूसरा मकसद बताया संस्कार। संस्कार एक प्रकार की आचार संहिता है। संस्कार एक प्रकार का कानून है। जिस परिवार में संस्कार ना हो, कोई नियमावली नहीं हो,कोई नीतियां नहीं हो, स्पष्ट रूपरेखा नहीं हो, उसे परिवार का सुरक्षित रहना बहुत मुश्किल है। हम बाहर की दुनिया की सदैव अव्यवस्था की बातें करते हैं। सदैव कमियां देखते रहते हैं। लेकिन अपने परिवार की नहीं सोचते। हमारे परिवार में भी आचार संहिता होनी चाहिए।
परिवार केवल शांति व संस्कार से पूरा नहीं होगा,प्रगति भी आवश्यक
उपाध्याय भगवंत ने तीसरा मकसद बताया प्रगति। परिवार केवल शांति व संस्कार के बगैर पूरा नहीं हो सकता। परिवार में रह रहे हो तो प्रगति आवश्यक है। परिवार के सदस्य को प्रगति की आवश्यकता होती है। बुद्धि, अर्थ साधनों की प्रगति तो बाहर की है। भीतर की प्रगति, अपने भावों की प्रगति, सम्यक ज्ञान की प्रगति, आदर्श जीवन की प्रगति होनी चाहिए। परिवार में ऐसा वातावरण रहना चाहिए जहां सभी एक दूसरे की प्रगति करें। हर सदस्य आगे बढ़े और दूसरे को आगे बढ़ने के लिए सहयोग दें। परिवार में जीने का मकसद यही है। परिवार में सभ्यता व संस्कृति नहीं सीखी तो कहीं पर नहीं सीख सकते। हमें परिवार में भी आचार संहिता बनानी चाहिए। परिवार में संस्कार स्थापित करना है तो आचार संहिता बनानी पड़ेगी।


