व्यापारी हित में चेम्बर की पहल, वर्गफुट शुल्क खत्म करने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
July 7, 2026रायपुर/छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने व्यापारियों के हितों को लेकर एक बार फिर सरकार के सामने अपनी बात रखी है। चेम्बर के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर ”छत्तीसगढ़ नगरपालिका (व्यापार अनुज्ञापन) नियम, 2025” में लागू वर्गफुट आधारित पंजीकरण शुल्क व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की।
चेम्बर ने मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में कहा कि सरकार द्वारा 43 प्रमुख व्यवसायों को ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता से मुक्त करने का निर्णय सराहनीय है और इससे प्रक्रियागत सरलीकरण को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन नियम-18 के तहत लागू वर्गफुट आधारित वार्षिक पंजीकरण शुल्क व्यापारियों के लिए राहत की जगह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया है।
चेम्बर के अनुसार नगर निगम क्षेत्रों में ₹6 प्रति वर्गफुट की दर से अधिकतम ₹30 हजार तक वार्षिक शुल्क तय किए जाने से छोटे और मध्यम व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। संगठन ने मांग की है कि वर्गफुट आधारित शुल्क को हटाकर सभी व्यापारियों के लिए लाइसेंसवार फ्लैट शुल्क प्रणाली लागू की जाए।
“निरीक्षण और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ेगी”
प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि वर्गफुट आधारित शुल्क व्यवस्था से दुकानों की नाप-जोख के नाम पर निरीक्षण, विवाद और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में Ease of Doing Business को बढ़ावा देना चाहती है तो वर्गफुट शुल्क समाप्त करना जरूरी है।
थौरानी ने यह भी स्पष्ट किया कि चेम्बर का उद्देश्य किसी निर्णय का विरोध करना नहीं है। संगठन की प्राथमिकता व्यापारियों की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान शासन तक पहुंचाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री व्यापारियों की इस न्यायोचित मांग पर सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के लाखों व्यापारियों को राहत देंगे।
कौन रहे मौजूद
इस अवसर पर चेम्बर संरक्षक एवं पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी, वाइस चेयरमेन चेतन तारवानी, सलाहकार अमर गिदवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी, जसप्रीत सिंह सलूजा, उपाध्यक्ष राजेश पोपटानी, मनीष प्रजापति, जितेन्द्र शादीजा, दिलीप इसरानी, ट्रांसपोर्ट चेम्बर अध्यक्ष हरचरण सिंह साहनी और आलू प्याज आढ़तिया संघ के अध्यक्ष अजय सहित चेम्बर के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
चेम्बर ने कहा कि प्रदेशभर से मिले सुझावों और व्यापारियों की चिंताओं के आधार पर यह मांगपत्र तैयार किया गया है और आगे भी व्यापारी हितों की आवाज शासन-प्रशासन तक प्रभावी रूप से उठाई जाती रहेगी।


