झलप अस्पताल की बदहाली सरकारी उदासीनता का परिणाम : विनोद चंद्राकर
June 20, 2026संपादक मनोज गोस्वामी
महासमुंद 20 जून 2026// पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने झलप के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डाॅक्टरों की कमी को भाजपा सरकार की ग्रामीण विरोधी नीति का परिणाम बताया है।
चंद्राकर ने कहा कि झलप के 20 बिस्तरों वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज भाजपा सरकार की लापरवाही का जीता-जागता सबूत बन चुका है। 80 गांवों की जीवनरेखा यह अस्पताल आज खुद वेंटिलेटर पर है। दस्तावेजों में डॉक्टर और आरएमए पदस्थ हैं, लेकिन हकीकत यह है कि चिकित्सा अधिकारी तीन महीने से पीजी पढ़ाई के नाम पर गायब हैं और आरएमए दो माह से छुट्टी पर हैं। तीसरे आरएमए को भी उसकी मूल जगह वापस भेज दिया गया था। मूलत: देखा जाए तो यह 20 बिस्तरों का अस्पताल केवल दो ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के भरोसे ही चल रहा है। सुबह 10 बजे से पहले आैर शाम 5 बजे के बाद यहां ईलाज की सुविधा नहीं मिल पाती।
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि सरकार केवल कमीशनखोरी में व्यस्त है। एक तरफ सरकारी अस्पतालों में नियर एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई कर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भर्ती न कर सरकारी स्वास्थ्य सेवा को जानबूझकर बदहाल कर दिया गया है। सरकार की अनदेखी व उदासीनता के चलते स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है।
भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। सरकारी अस्पतालों में उपचार नहीं मिलने से मरीज निजी अस्पतालों में जाने विवश हो रहे हैं। सामान्य बुखार से लेकर गंभीर मरीजों तक को डॉक्टर न होने के कारण 50 किमी दूर जिला अस्पताल धकेला जा रहा है। गरीब ग्रामीण परिवार इलाज के अभाव में समय और पैसा दोनों गंवा रहे हैं। नेशनल हाइवे से लगा यह अस्पताल दुर्घटना पीड़ितों के लिए संजीवनी होना चाहिए था, लेकिन सरकार की उदासीनता और कमीशन के खेल ने इसे सिर्फ रेफर सेंटर बना दिया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तथा विभागीय अधिकारी प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था होने के दावे करते हैं। लेकिन, झलप शासकीय अस्पताल उन सारे दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। डबल इंजन सरकार सिर्फ कमीशनखोरी और भाषणों में व्यस्त है।
चंद्राकर ने कहा कि झलप अस्पताल में शीघ्र स्थायी डॉक्टर और आरएमए की पदस्थापना की जाए। ताकि, क्षेत्र के ग्रामीणों को नि:शुल्क व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।



