देव, गुरु, धर्म की प्राप्ति सर्वोच्च उपलब्धि : मनीष सागरजी महाराज
October 6, 2025विवेकानंद नगर में नवपद ओलीजी के आठवे दिन हुई सम्यक चारित्र्य पद की आराधना
रायपुर। विवेकानंद नगर में जारी नवपद ओलीजी की आराधना के आठवे दिन सम्यक चारित्र्य पद की आराधना की गई। धर्मसभा में सोमवार को उपाध्याय प्रवर युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने कहा कि देव, गुरु और धर्म की प्राप्ति हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि सम्यक चारित्र्य मोह से लड़कर आत्मा को स्थिर रखने की कला है। इस कला को पाने का प्रयास सभी सम्यक दृष्टि जीव करते हैं। कोई कोई ही इस सम्यक चारित्र्य को प्राप्त कर पाता है। जीवन में सम्यक चारित्र्य पद की आराधना अवश्य करनी चाहिए।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि सम्यक चारित्र्य पद की आराधना मनुष्य गति में ही संभव है। पर्याप्त जीवन है व आर्य देश है। सकल इंद्रियां हैं व स्वस्थ शरीर है। इसके साथ ही सम्यक दर्शन व सम्यक ज्ञान है। देव, गुरु और धर्म का आश्रय है। इनके माध्यम से पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। ये पुरुषार्थ ही मोह के पड़ाव को पार कर दे तो जीव सम्यक चारित्र्य की प्राप्ति कर लेता है।जिन्होंने सम्यक चारित्र्य को प्राप्त कर लिया उसके जीवन से सीख लेना चाहिए। उनका अनुसरण कर अपने आत्म कल्याण के लिए अग्रसर होना चाहिए।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि बाहर से चारित्र्य की अभिव्यक्ति है। वास्तविक चारित्र्य भीतर ही है। कषायों पर विजय पाने से चारित्र्य की प्राप्ति होती है। सम्यक दर्शन व सम्यक ज्ञान के बल पर भीतर के कषायों पर विजय पाना है। तत्व के बल पर यह संभव है। तत्व की प्राप्ति कर जीवन में लागू करते हैं तो कषाय मिट जाता है। जैसे-जैसे कषाय कम होगा वैसे-वैसे चारित्र्य प्राप्त करने की योग्यता प्रकट होती है। जो सही ढंग से सम्यक चारित्र्य का निर्वाह करेगा, उस जीव के सात आठ भाव से अधिक इस संसार में श्रेष्ठ नहीं रहते हैं। अल्प काल इस संसार परिभ्रमण का शेष होता है।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि चारित्र्य प्राप्ति के लिए भीतर के राग को तोड़ने की साधना करना है। वास्तव में सम्यक चारित्र्य ज्ञानपूर्वक ही होता है। तत्वों के बल पर कषायों पर विजय प्राप्त करने से ही संभव होगा। निमित्त के अधीन होकर ठीक होना एक पात्रता है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। जब तक भीतर तत्व की जागृति नहीं आएगी। तत्व को लागू कर चारित्र्य की प्राप्ति नहीं करेंगे,तब तक हमारा चारित्र्य सच्चा नहीं होगा।


