जैन श्वेतांबर समाज के पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का आरंभ 20 अगस्त से,टेगौर नगर पटवा भवन में होंगे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान

जैन श्वेतांबर समाज के पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का आरंभ 20 अगस्त से,टेगौर नगर पटवा भवन में होंगे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान

August 19, 2025 0 By Central News Service

रायपुर। जैन श्वेतांबर
समाज का सबसे प्रमुख पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 20 अगस्त से आरंभ हो रहा है। पर्वाधिराज पर्यूषण 20 अगस्त से 27 अगस्त तक उपाध्याय भगवंत युवा मनीषी परमपूज्य श्री मनीष सागरजी महाराज साहब आदि ठाणा के पावन निश्रा में टेगौर नगर स्थित पटवा भवन में संपन्न होगा। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक समाज एवं चातुर्मास समिति विवेकानंद नगर रायपुर ने सभी समजाजनों को आत्मकल्याण के लिए शामिल होने का आग्रह किया है।

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्यामसुंदर बैदमुथा ने बताया कि
पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के प्रथम दिन मोक्ष तप प्रारंभ होगा। इसमें सात एकासना, एक उपवास होगा। अक्षयनिधि एवं विजयकषाय तप जारी है। पौषध ग्रहण करने के इच्छुक समाजजनों को प्रात: 5 से सवा 5 बजे के बीच श्री ज्ञान वल्लभ उपाश्रय विवेकानंद नगर में उपस्थित होना होगा। विलंब से पहुंचने पर साढ़े 6 बजे पौषध दिलाया जाएगा। प्रतिक्रमण राई सुबह 5.30 बजे, देवसी शाम 6.30 बजे श्री ज्ञान वल्लभ उपाश्रय विवेकानंद नगर में होगा।

उन्होंने बताया कि पटवा भवन टैगोर नगर में प्रवचन सुबह ठीक 8.15 बजे से होगा। कल्पसूत्र (पोथाजी) बोहराने की बोली पहले दिन प्रवचन के मध्य में होगी। परमात्मा का जन्मवांचन 24 अगस्त दोपहर 1.30 बजे से होगा। तदुपरांत स्वामी वात्सल्य होगा।

विदित हो कि यह महापर्व आत्मा की शुद्धि और धार्मिक अनुशासन का प्रतीक है। जैन समाज के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दौरान समाजजन धर्म, ध्यान, तप,त्याग,दान,उपवास के माध्यम से अपने भीतर की शांति और आत्म संतुलन करते हैं। यह समय न केवल आत्म-चिंतन का होता है बल्कि समाज में एकता और सद्भावना को बढ़ावा देने का भी अवसर प्रदान करता है।

जैन समाज का पर्युषण पर्व आत्मा की शुद्धि और आत्मिक उन्नति का महापर्व है। समाजजन आत्म-अनुशासन, व्रत-उपवास, तपस्या और प्रार्थना द्वारा पांच महाव्रतों अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह का पालन करते हैं। यह पर्व समाज के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। साधु-साध्वी प्रवचन देते हैं और श्रावक-श्राविकाएं धर्म-ग्रंथों का अध्ययन व आत्म-चिंतन करते हैं। पर्व का समापन क्षमावाणी के दिन होता है। जब अनुयायी एक-दूसरे से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं। पर्युषण पर्व के दौरान जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भगवान महावीर का जन्मोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पर्युषण पर्व के दौरान मंदिरों में विशेष पूजन भी होगी। इन दिनों श्रावक श्राविकाएं सामायिक के साथ ही स्वाध्याय, अंतगढ, कल्पसूत्र का वाचन करते हैं। प्रतिदिन शाम को आत्मा के कल्याण के लिए प्रतिक्रमण क्रिया भी होगी। मंदिर में रोज स्नात्र पूजा के साथ भगवान की आंगी सजाई जाएगी।